काव्य : दादी सुनाओ एक कहानी – डॉ.वन्दना मिश्र,भोपाल

दादी सुनाओ एक कहानी

सुन लो बच्चो एक कहानी ।
राजा थे उनकी थीं रानी।।

रामचन्द्र को जनम दिया था
भरत कैकयी से जनमा था।
कौशल्या राम की महतारी
सुमित्रा सहित तीन थीं नारी।।

राजा दशरथ पिता राम के
चार पुत्र थे चार धाम से
बड़े राम जो रुप मनोहर,
लखन शत्रुघ्न थे सहोदर।।

गुरु वशिष्ट से शिक्षा पाई
विश्वामित्र ने आजमाई ।।
ताड़क वन में ताड़का मारी
गौतम नारी अहिल्या तारी।
जा पहुँचे मैथिल के धाम
कुछ दिन किया वहीं विश्राम।।

राजा जनक ने यज्ञ रचाया
धनुष यज्ञ विधान कराया।
सारे राजा हार गये थे
धनुष तनिक भी न हिला सके थे।।

आँगन उदास हुआ मैथिल का
विश्‍वामित्र बोले-
समय नही है यह रुकने का।।

दिया आदेश राम तुम जाओ
धनुष यज्ञ पूरा करवाओ
मुनि आशीष पाकर अवधेश
चरण रज लगा मुनि की शीष।।
धनुष उठाकर शीष लगाया
और ब्रहमांड को शीष झुकाया।
धनुष प्रत्यंचा जो डाली
जय-जयकार हुई थी भारी ।।
टूट गया धनुष तनिक टंकार से
समझ न सके शक्ति को प्यार से।
गूँज आकाश तक जो बिखरने लगी
बूँदे आसमान से बरसने लगी्ं।।

तप टूट गया
प्रभु रुठ गया।
अनिष्ट है या कृपा दृष्टि है
परशुराम ले फरसा बढ़ते गये
रौद्र रुप में वे चलते गये ।।

देखूँ कौन है निर्धन
आयु किसकी खतम
आ आज तू अभी इसी छन
आ सामने मूरख तू कौन है
डर गया तू जो मौन है ।।

मुनि मुस्काए तनिक प्रणाम किया
राम है नाम जिसने धनुर्भंग किया।
राम के आते ही ममता की नदी बह गयी
क्रोध अग्नि प्रेम जल से बुझ गयी।

ढोल ढम-ढम बजे गीत गाने लगे
सज गये कलश सब द्वार-चार के
हुआ स्वयंवर वहीं सिया राम का
जग भर उठा सही राम नाम का।।

ढोल बजने लगे बजी शहनाइयाँ
राम दूल्‍हाँ थे सिय दुल्हनियाँ।
खुश माता- पिता खुश जनता हुई
धूम-धाम से शादी संपन्‍न हुई ।।

डॉ.वन्दना मिश्र
शिक्षाविद और साहित्यकार
भोपाल