काव्य : गीता जयंती – किरण काजल बेंगलुरु

गीता जयंती

जीवन का सार बताती गीता सदमार्ग दिखाती गीता
कर्म पथ पर चलना सिखाती गीता
जीवन नहीं आसान समझाती गीता
पाप पुण्य का भेद बताती गीता
धर्म अधर्म से पर्दा हटती गीता
जीवन के उलझनों को सुलझाती गीता
मर्यादा का पाठ पढ़ाती गीता
जीवन रूपी नौका को पार लगाती गीता
जन्म से नहीं कर्म से महान बनों
कर्म करना सिखाती गीता
मानव जीवन का कर्म है आधार
कर्म से अवगत कराती गीता
मानव मूल्यों को समझाती गीता
प्रेम आधार है सृष्टि का
प्रेम की परिभाषा बताती गीता
रिश्ते नहीं होते शतरंज के मोहरे
रिश्तो की सार समझाती गीता
सत्य की जय और झूठ की क्षय हमेशा होती है
हर झूठ से पर्दा उठाती गीता
दर्पण है मानव जीवन का गीता मन के भाव दिखाती गीता…!!

किरण काजल
बेंगलुरु