काव्य : ज़िंदगी – गोविंद “आनंद” सुरत, गुजरात

ज़िंदगी

दुनिया में आना और जाना , ज़िंदगी है ,
जीवन में खोना और पाना , ज़िंदगी है ।

खुशी और ग़म का काम है आन – जाना ,
हर हाल में संभल जाना , ज़िंदगी है ।

उत्तार चढ़ाव तो आते ही हैं जीवन में ,
इन से न कभी भी घबराना , ज़िंदगी है ।

मतलबी है सारी दुनिया समझ ले तू ,
फिर भी इस से है निभाना , ज़िंदगी है ।

अपने हों या पराये , दु:ख में हैं दूर रहते ,
उसका क्या मातम मनाना , ज़िंदगी है ।

जीवन यात्रा कठिन लगे या लगे सरल ,
हँसकर ही है इसे बिताना , ज़िंदगी है ।

गोविंद “आनंद”
सुरत, गुजरात