काव्य : ग़ज़ल – सुरेश पटवा भोपाल

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ग़ज़ल

ज़िंदगी तकलीफ़ देती पर वो है हसीना भी,
मुहब्बत में पड़ता है मर-मर कर जीना भी।

बदा तकदीर में गर डूबना तो कौन रोकेगा,
तूफ़ान की जद में नाख़ुदा भी सफ़ीना भी।

सितारे गर्दिश हों तो होती हर बात बेमानी,
नहीं दिल लुभाती कोई करिश्मा करीना भी।

संग हो गये दीदे तुम्हारे इंतज़ार में दिलवर,
अश्कबारी से शर्माया सावन का महीना भी।

ईसा की फ़ेहरिस्त में एक नाम था उसका,
उम्मीद ना थी निकला ‘आतिश’ कमीना भी।

सुरेश पटवा
भोपाल

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