काव्य : अच्छी खबरें – श्रीमती शेफालिका सिन्हा रांची

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अच्छी खबरें

अच्छी खबरों का क्या हो गया अकाल
जहां देखो वहां सब बेहाल ही बेहाल।

व्यापार बढाने को, जनता को लुभाने को
ऐसी खबरें चला रहे जैसे नहीं कोई मलाल।

शोर मचाने से अपराधी को मिले सजा
तब ही माना जाए इनका कुछ कमाल।

खबरों में तड़का और चाट मसाला डाल
परोस रहे ऐसे, जैसे कर रहे धमाल।

कुछ अच्छी खबरें चुनकर लाओ
अच्छा भी हो रहा सबको बतलाओ,
शुद्ध स्वच्छ हवा दिमाग तक पहुंचाओ।

श्रीमती शेफालिका सिन्हा
रांची, झारखंड।

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