काव्य : पदार्थ की संरचना – डाॅ० उपासना पाण्डेय, प्रयागराज

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पदार्थ की संरचना (बाल – कविता)

पदार्थ की कैसे हुई संरचना ?
जब मानव को हुई उत्सुकता।
तब प्रयोग से पता लगाया ,
पदार्थ पिण्डों से बना हुआ।

पिंड छोटे-छोटे कणों बने हुए,
नग्न नेत्रों से यह नहीं दिखे।
मानव ने ‘परमाणु’ नाम दिया,
अगले पड़ाव पर पग डाल दिया।

परमाणु किससे मिलकर बना,
यह जानने को फिर से ठना।
सोचा, बन्द सन्दूक खोले बिना,
जानूँ कैसे अंदर पानी या हवा।

कोई तो होगा सरल उपाय?
आख़िर कैसे जाना जाय?
सन्दूक की सतह पर टकरा,
ध्वनि को सुना कान लगा ।

हवा होगी तो ध्वनि खोखली ,
ठोस हुआ ध्वनि भारी होगी।
किसी प्रकार कुछ करना होगा,
परमाणु – विषय में जानना होगा।

स्वर्णपटल पर किरण गिरा,
प्रयोग कर यह पता किया।
परमाणु के केन्द्र में नाभिक भारी,
धनात्मक व उदासीन कणों से बना।

अधिकांश स्थान तो इसमें है खाली,
ऋणात्मक- गतिमान कणों से बना।
मानव-जिज्ञासा को निष्कर्ष मिला,
पदार्थ की संरचना का ज्ञान मिला।

डाॅ० उपासना पाण्डेय,
प्रयागराज

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