वीर सुभाष चंद्र बोस पर वेबीनार का आयोजन किया

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वीर सुभाष चंद्र बोस पर वेबीनार का आयोजन किया

सागर।
भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत दूर्वा मंडल संयोजिका डॉ श्रीमती प्रीति शर्मा के द्वारा भारत के अज्ञात वीर सुभाष चंद्र बोस पर वेबीनार का आयोजन किया गया।
ध्येय वाक्य श्रीमती शोभा सराफ, ध्येय मंत्र श्रीमती कविता लारिया, संगठन के गीत श्रीमती राजश्री दवे, सरस्वती वंदना श्रीमती सोनिका सराफ द्वारा प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर श्रीमती अनुश्री शैलेंद्र जैन ने कहा सुभाष चंद्र बोस देश के महान स्वतंत्रता सेनानी आजादी के महानायक वतन पर मर मिटने वाले परवाने सुभाष चंद्र बोस जिन्हें राष्ट्र नेताजी के नाम से भी जानता है भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के सुनहरे पन्नों पर जितनी जगह नेताजी को अपनी कीर्ति देशभक्ति दूरदर्शिता और विराट व्यक्तित्व की वजह से मिलना चाहिए दुर्भाग्य से वह नहीं मिली है सुभाष बाबू के उस पहलू के बारे में तो लोग ज्यादा से ज्यादा जानते हैं जिसमें वह आजादी की लड़ाई के जुझारू योद्धा और गजब के नेतृत्वकर्ता थे उन्होंने ऐसे काम किए जो असंभव थे लेकिन उनका एक पहलू आध्यात्मिक भी था वो रोज ध्यान करते थे मां दुर्गा के उपासक थे देश की आजादी के बारे में जब जब बात होगी तब उस अज्ञात वीर सुभाष चंद्र बोस का नाम सर्वप्रथम आएगा।
डॉ सरोज गुप्ता ने कहा कि जननायक सुभाष चन्द्र बोस अत्यंत भावुक और प्रबुद्ध वीर रहे जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा में चयनित होने के वावजूद भी भारत में चल रहे स्वाधीनता आंदोलन से प्रभावित होकर तथा जलियांवाला बाग के नृशंस नरसंहार को देखकर अपने गुरु चितरंजन दास के नेतृत्व में आजादी के लिए भारतीय राजनीति में सक्रिय हुए। गुमनाम बाबा के रुप में मरते दम तक वह अज्ञात वीर बने रहे।डॉ श्रीमती प्रीति शर्मा ने कहा सुभाष बाबू ने ऐसे भारत का सपना देखा था जिसमें सभी के पास समान अधिकार हो सभी के पास समान अवसर हो जो अपनी प्राचीन परंपराओं से प्रेरणा ले और गौरवपूर्ण बनाने वाला सुखी और समृद्ध सशक्त भारत का निर्माण हो सके सुभाष बाबू का मानना था यदि हमें आजादी चाहिए तो हमें खून के दरिया से गुजरने को तैयार रहना चाहिए एवं विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बनाने और भारत की स्वाधीनता के लक्ष्य के निकट पहुंचाने के लिए सभी संभव प्रयास करना चाहिए। डॉ उषा मिश्रा ने कहा अब आवश्यक है कि जन जन के नायक नेता जी, जो त्याग, साहस, शौर्य, बुद्धिमत्ता बलिदान और नेतृत्व क्षमता के बेमिसाल उदाहरण थे सत्य और उनकी “फॉरगॉटन आर्मी” के सारे तथ्य देश के सामने उजागर हों।श्रीमती शोभा सराफ ने कहा किसी भी राष्ट्र के लिए स्वाधीनता सर्वोपरि है वह आजादी की अलग जगह पर आंतरिक शक्तियों और दृढ़ संकल्प के माध्यम से अंग्रेजों की दासता से मुक्त आत्मनिर्भर भारत बनाना चाहते थे
डॉ प्रतिभा श्रीवास्तव ने कहा महानायक सुभास चंद्र बोस का जनम 23जनवरी 1897को कटक में पिता वकील जानकी नाथ , माता प्रभा बती के यहाँ हुआ। अंग्रेजों के दमन चक्र के विरोध में पूरा भारत था।उनके पिता ने दमन चक्र क विरोध में “रायबहदुर की उपाधि लौटा दी”इससे सुभास जी के मन मे अग्रेजो के प्रति कटुता ने घर कर लिया।फिर क्या था सुभाष ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने व भारत को स्वतंत्र कराने का आत्म संकल्प ले,चल पड़े राष्ट्र कर्म की राह पर ।और जीवन के अन्तिम समय तक राष्ट्र को स्वतंत्र कराने में अपना वलिदान दिया। उनका नारा दिया तुम मुझे खूनदो मै तुम्हे आजादी दूँगा ।सुश्री मेघा दुबे ने कहा आज भी हम नेताजी से प्रेरणा पाते हैं सुभाष बाबू का बलिदान सर्वोपरि है राष्ट्र उनका ऋणी रहेगा ।श्रीमती शशि दीक्षित ने कहा जय हिंद का नारा देने वाले, आज़ाद हिद फौज के निर्माता नेता जी सुभाष चन्द्र बोस में देशभक्ति की भावना बचपन से ही हिलोरे लिया करती थी.. नेताजी ने पूर्ण स्वाधीनता को युवाओं के समक्ष एक मिशन के रुप में रखा उनके एक आवाह्न पर आज़ादी के दीवानों की आज़ाद हिंद फौज बन गयी।श्रीमती राजश्रीदवे ने कहा सफलता हमेशा असफलता के स्तंभ पर खड़ी होती हैं इसलिए किसी को भी असफलता से घबराना नहीं चाहिए। सफलता दूर हो सकती है, लेकिन वह मिलती जरूर है l ये महान विचार नेताजी सुभाषचंद्र बोस के हैं जिनकी जयंती पूरा देश उत्सव की तरह मना रहा है। श्रीमती शैलबाला सुनरिया ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपनी नजरबंदी को अंगूठा दिखाते हुए अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंक कर जर्मनी जा पहुंचे थे जर्मनी से जब सुभाष बाबू का पहला रेडियो प्रसारण हुआ और उनकी जोशीली आवाज को सुना गया तो सारा देश खुशी से झूम उठा तब भी अंग्रेजी सरकार ने घोषणा की थी कि सुभाष हवाई दुर्घटना में मारे गए जर्मनी से प्रसारित भाषण के बाद देश तो खुशी से झूमा
श्रीमती कविता लारिया ने कहा सुभाष चंद्र बोस को आजादी अपने प्राणों से भी प्यारी थी, अखंड भारत के प्रबल समर्थक थे वे अखंड भारत के लिए आजादी की लड़ाई मैं कुछ और विलंब कर सकते थे परंतु वे देश को टुकड़ों में नहीं बटने देना चाहते थे। श्रीमती आराधना रावत ने कहा वीर जतिन दास ने अंग्रेजों के साम्राज्य के विनाश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी जिन्हें नेताजी ने भारत का युवा दधीचि कहा था जिनकी वीर गाथा का उल्लेख भारतीय इतिहास में कहीं नहीं मिलता । श्रीमती पूनम मेवाती ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस गुमनामी बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए उनकी मौत एक पहेली बन गई। श्रीमती रूपा राज ने कहा महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया था ।श्रीमती मनीषा मिश्रा ने कहा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने अपने भाषण में कहा था कि विचार व्यक्ति को कार्य करने के लिए धरातल प्रदान करता है ‌। उन्नतिशील शक्तिशाली जाति और पीढ़ी की उत्पत्ति के लिए हमें बेहतर विचार वाले पथ का अवलंबन करना होगा। डॉ कृष्णा गुप्ता ने कहा नेताजी स्वामी विवेकानंद के अनुयाई थे उनके ऊपर विवेकानंद जी का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता था इन्होंने अपना नाम बदलकर विभिन्न प्रकार की रणनीति भारत को आजाद कराने के लिए बनाई हम भारतवासी सदैव नेताजी के आभारी रहेंगे। श्रीमती विनीता राजपूत ने कहासुभाष चंद्र बोस को आजादी अपने प्राणों से भी प्यारी थी , अखंड भारत के प्रबल समर्थक थे वे अखंड भारत के लिए आजादी की लड़ाई मैं कुछ और विलंब कर सकते थे सकते थे परंतु वे देश को टुकड़ों में नहीं बटने देना चाहते थे वे नहीं चाहते थे की कि भारत के किसी भी अंग के टुकड़े हो या काटकर भारत से मुक्त किया जाए , उनका सपना अखंड भारत का था वे मुक्ति‌ संग्राम के ऐसी अजय योद्धा है वह। श्रीमती विमलेश गुप्ता ने कहा आज हमें सुभाष चंद्र बोस की आवश्यकता है। संचालन आराधना रावत ने किया एवं अंत में डॉ प्रीति शर्मा ने आभार माना। इस अवसर पर पूनम साहू, श्रीमती सविता साहू, श्रीमती दिव्या मेहता आदि भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प की बड़ी संख्या में मातृशक्तियां उपस्थित रहीं।

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