काव्य : देश का तिरंगा,बुलंद करें बेटियाँ – डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

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देश का तिरंगा,बुलंद करें बेटियाँ

ये गरीब,किसानों व गाँव की बेटियाँ
बहुत दूर,पहुँच, चमक रही बेटियाँ

खाने के लाले,और न मिलते निवाले
देश का तिरंगा,बुलन्द करें बेटियाँ

कोख से मुश्किल से,निकल रही बेटियाँ
खिलवाड़ में,खेल में चमक रही बेटियाँ

जीने की मुश्किल,पढ़ने की मुश्किल
सभी हल क़रतीं,लाती हैं पदक बेटियाँ

पुरुष मानसिकता से लड़तीं
पोशाक से झगड़तीं,देश की बुलंदी हैं आज बेटियाँ

बुरी नजरों से बचतीं,बुरी भी कही जातीं
सफल,शीर्ष पर अब,पहुंच रही बेटियाँ

पचहत्तर के देश में, सुधार हैं जरूरी
ललकार रहीं, ब्रज,पुकार रहीं बेटियाँ

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

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