काव्य : दर्द को छिपा जाते हैं – श्रीमती शेफालिका सिन्हा रांची

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दर्द को छिपा जाते हैं

गाते हैं, गुनगुनाते हैं
दर्द को छिपा जाते हैं।

भूलने की कोशिश में,
हर पल याद आ जाते हैं।

कसम खाई न मिलने की,
मिलने चले जाते हैं।

मौन रहते हैं,
पर बहुत कुछ कह जाते हैं ।

जिंदगी जीने की चाह में,
हर पल मरते जाते हैं।

पढ़ी तो किताबें बहुत,
पर,अनपढ़ ही रह जाते हैं।

रिश्ते करीब बहुत
पर,दुश्मन बन जाते हैं।

गाते हैं,गुनगुनाते हैं
दर्द को छिपा जाते हैं।।

श्रीमती शेफालिका सिन्हा
रांची,झारखंड।

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