भारत जोड़ो पदयात्रा से कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी – नरेंद्र तिवारी ‘पत्रकार’ सेंधवा

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भारत जोड़ो पदयात्रा से कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी

विचार राजनीति को संबल प्रदान करतें हैं। इसी वैचारिक जुड़ाव के कारण ही आमजन राजनैतिक दल की ओर आकर्षित होता हैं, उससे जुड़ता हैं, यही विचार एक आम आदमी को स्थाई तौर पर राजनैतिक दल का समर्थक, नेता या कार्यकर्ता बना देतें हैं। यहीं समर्थक, नेता, कार्यकर्ता मतदाताओं के सामने पार्टी का पक्ष रखता हैं। उसकी जमीन तैयार करता हैं। यह निरन्तर चलने वाला क्रम हैं। इसी विचार की तलाश में भारत का सबसे पुराना राजनैतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत जोड़ो पदयात्रा के माध्यम से अपनी खोई प्रतिष्ठा पाने के लिए प्रयासरत हैं। तमिलनाडू के कन्याकुमारी से 7 सितम्बर को प्रारम्भ यह पदयात्रा 12 राज्यो 2 केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरती हुई। पांच माह याने 150 दिनों में 3,570 किलोमीटर का सफर तय कर काश्मीर पहुचेगी। काश्मीर यात्रा का अंतिम पड़ाव होगा। यात्रा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित 150 यात्रीगण शामिल हैं। इस यात्रा में गैर राजनैतिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। जो यह मानतें हैं कि भारत की गंगा जमुनी संस्कृति पर विगत बरसों में बेहद कठोर प्रहार हो रहें है। इन प्रहारों से साम्प्रदायिक वैमनस्य बढ़ रहा हैं। जिससे दिलो के मध्य दूरियां बढ़ गयी हैं। इन दूरियों को बढाने वाले तत्वों के पास बिखराव का बहुत मसाला है, किंतु जुड़ाव की कोई दवा नहीं हैं। जुड़ाव की इसी कोशिश को लेकर बहुत से गैर कांग्रेसी सामाजिक कार्यकर्ता भी यात्रा में शामिल हुए हैं। भारत जोड़ों यात्रा को प्रारम्भ से ही व्यापक जनसमर्थन मिल रहा हैं। दरअसल वर्तमान परिस्थितियों में धार्मिक उन्माद के परिणामस्वरूप कट्टरवाद हावी हैं। इन हालातों में भारत को जोड़ने की पदयात्रा का अपना महत्व हैं। अनेकता में एकता भारत की विशेषता हैं। भारत जोड़ो पदयात्रा में इसी अनेकता में एकता की भावना को मजबूत करने का भाव दिखाई दे रहा हैं। इस यात्रा की शुरुआत से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया हैं। यह आरोप इतने सस्ते कमजोर और विचारहीन हैं। जिन्हें सुनकर इन विचारों को प्रदर्शित करने वाले ओर फैलाने वाले तत्वों में पनप रहीं वैचारिक शून्यता साफ नजर आतीं हैं। यह आरोप कीमती टीशर्ट ओर महंगे जूते एवं यात्रा के प्रबंध में लगे कंटेनरों के आरोप से जुड़े हुए हैं। इन आरोपों ने शायद इस पदयात्रा को अधिक चर्चित बना दिया हैं। आरोपों की श्रृंखला में भाजपा की महिला नेत्री, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का स्वामी विवेकानन्द को याद न करने के बारे में लगाया आरोप भी एकदम सफेद झूठ साबित हुआ हैं। भारत जोड़ो पदयात्रा पर एक सबसे बड़ा आरोप यह भी लग रहा कि इस यात्रा के माध्यम से काँग्रेस राजनीति कर रही है। यह भारत जोड़ों नही, सत्ता के लिए यात्रा हैं। इस आरोप में इसलिए कोई दम नहीं दिखता हैं। प्रत्येक राजनैतिक दल का यह हक हैं कि वह सत्ता प्राप्ति का प्रयास करें। सत्ता प्राप्ति का यह प्रयास वह अच्छे विचार से करें। इस दिशा में कांग्रेस का भारत जोड़ो पदयात्रा के माध्यम से कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास एक बेहतर राजनैतिक कदम हैं। यह कदम भारत के राष्ट्रीय एकता के विचार से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। देश मे जब अनर्गल प्रलापों ओर हेट स्पीच से भारत के मूल विचार एकता में अखण्डता की भावना को खंडित करने के प्रयास लगातार किये जा रहे हों, ऐसे दौर में राष्ट्रीय एकता और सर्वधर्म समभाव की बात करना कांग्रेस का स्वागत योग्य कदम हैं। असल मे भारत देश मे पदयात्राओं का अपना महत्व हैं। यह सामान्य जनजीवन को निकट से जानने और उनसे जुड़ने का माध्यम हैं। भारत मे आदि शंकराचार्य, धर्माचार्यों ने राष्ट्र भ्रमण कर आध्यात्मिक संदेशों को जन-जन तक पहूंचाया हैं। बुद्ध, महावीर ओर गुरु नानकदेव ने भी पदयात्राओं के माध्यम एक नवीन सन्देश जनसामान्य तक पहुचाने का काम किया था। आजादी के आंदोलन में महात्मा गांधी का दांडी मार्च बेहद प्रभावशाली पदयात्रा थी। उन्होंने 358 किमी की दांडी पदयात्रा के माध्यम से 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुचकर नमक कानून तोड़ा। इस यात्रा ने अंग्रेजो के खिलाफ माहौल का निर्माण किया था। आजादी के बाद विनोबा भावे, चंद्रशेखर ओर सुनील दत्त की पैदल यात्रा बेहद प्रभावकारी रहीं इन यात्राओं में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा का जिक्र करना भी लाजमी होगा। भारत जोड़ों यात्रा का कितना राजनैतिक प्रभाव होगा इसका अहसास तो आने वाले वक्त में भी मालूम हो सकेगा। फिलवक्त तो भारत जोड़ों यात्रा का सन्देश ही एक बदलते राजनैतिक वातावरण का संकेत देता दिखाई दे रहा हैं। भारत जोड़ो पद यात्रा के बाद राहुल गांधी की राजनैतिक छवि में निखार आने की पूर्ण संभावना हैं। राहुल और वर्तमान की कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी जनता से जुड़ाव की कमी हैं। पदयात्रा कांग्रेस के जनता से जुड़ने का कारण बनेगीं। कांग्रेस नेता जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं से वाकिफ हो सकेंगे। जनता भी राहुल को अपने बीच पाकर उनके भारत जोड़ों यात्रा से जुड़े विचार उनकी आमलोगों के प्रति चिन्ता को समझ पाएगीं। भारत की एकता का विचार ही राष्ट्रीयता हैं। भारत जोड़ों पदयात्रा भी इसी राष्ट्रीय विचार से जुड़ी हुई दिखाई दे रहीं हैं। भारत के जनमानस से जुड़ कर राहुल गांधी एक परिष्कृत नेता बन सकेंगे। भारत जोड़ों पदयात्रा तमाम आरोपों एवं आलोचनाओं के बावजूद आगे बढ़ रहीं हैं। पदयात्रा का कारवां जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा हैं। यात्रा का प्रभाव भी बढ़ रहा है।इसके ओर आगे बढ़ते ही इसके प्रभाव में बढ़ोतरी होगीं। भारत जोड़ों पदयात्रा कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगीं। जैसा कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश कह रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें 100 फीसदी यकीन है कि भारत जोड़ो पदयात्रा कांग्रेस के लिए जीवन रक्षक है, संजीवनी है, यह काँग्रेस को आक्रमक तेवर प्रदान करेगी, यह कांग्रेस को पुर्नजीवित करने जा रहीं हैं, यह कांग्रेस को नई शक्ल देगी, यात्रा कांग्रेस को नए अवतार में पेश करेंगी। यात्रा के शुरूवातीं तेवर देखकर जयराम के उक्त कथन पर विश्वास किया जा सकता हैं। भारत जोड़ो यात्रा देश के राजनैतिक वातावरण के बदलने का संकेत दे रही हैं।

नरेंद्र तिवारी ‘पत्रकार’
सेंधवा जिला बड़वानी मप्र।
मोबा-9425089251

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