काव्य : लावणी छंद – सुषमा शर्मा इन्दौर

70

दिव्यालय में हुई प्रतियोगिता दिवस की श्रेष्ठ रचना

लावणी छंद

हिन्दी लिखते भारत वासी,ज्ञानी भाषा है प्यारी।
शब्द-शब्द में अर्थ छुपा है, सकल वर्ण सब है भारी।।

सुंदर सौम्या हिन्दी देखो,लगती मीठी है बोली।
मातृ भूमि का गौरव बनकर,स्वाभाविक सी है भोली।।
लिखना पढ़ना बच्चों सीखों,सीखो सारे नर नारी।
शब्द-शब्द में अर्थ छुपा है,सकल वर्ण सब है भारी।।

हिन्दुस्तानी शान निराली, फहराए परचम न्यारा।
लिखते लेखक हिन्दी में सब,बहे कलम से नित धारा।।
शिल्प ज्ञान से अंतस हर्षित, है विधान पे मन वारी।
शब्द-शब्द में अर्थ छुपा है,सकल वर्ण सब है भारी।।

रक्षा करना इसकी प्यारों, सृजन साहित्य करना है।
अंग्रेजी को छोड़ो अब सब, हिन्दी हृद रस भरना है।।
भाषाविद माने भाषा को, आई क्या है लाचारी।
शब्द-शब्द में अर्थ छुपा है,सकल वर्ण सब है भारी।।

सुषमा शर्मा
इन्दौर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here