राजभाषा हिंदी का महत्व – डॉ सुषमावीरेंद्र खरे , सिहोरा जबलपुर

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राजभाषा हिंदी का महत्व

हिंदी हमारी मातृभाषा है यह हमारी मां है तो हम अपनी मां का महत्व कैसे घटने दे सकते हैं ये बात अलग है कि कुछ ना समझ लोग आधुनिकता की होड़ में अंग्रेजी भाषा का उपयोग करके अपनी शान समझते हैं और हिंदी बोलने वालों का परिहास करके उन्हें बेइज्जत करने की कोशिश करते हैं पर ये वो लोग होते हैं जिन पर ये कहावत सटीक बैठती है कि “अधजल गगरी छलकत जाय ” मतलब सीधा सा है कि अंग्रेजी बोलने वालों को तो न अंग्रेजी का ही पूर्ण ज्ञान होता है और न ही हिंदी का ।वे तो अधकचरे से होते हैं और हमारी युवा पीढ़ी ऐसी ही हो रही है और इसमें 100% गल्ती हम अभिभावकों की है जो अपने बच्चों को अधिक होनहार देखना चाहते हैं और इसके लिए हमें लगता है कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालय ही उन्हे होनहार बना सकता है और हम अपनी हैसियत से भी अधिक खर्च करके उन्हें अंग्रेजी पढ़ने भेजते हैं कारण यही है कि आजकी युवा पीढ़ी हिंदी का ह भी नहीं जानती न ही हमारे लिए हिंदी का क्या महत्व है ये भी नहीं जानती ।संस्कार किस चिड़िया का नाम है उन्हें पता ही नहीं ।हिंदी का महत्व क्या है कैसे और हमें हिंदी की जरूरत है यह तो हमें सिखाना होगा अपने बच्चों को ।मैं ये नहीं कहती कि अंग्रेजी न पढ़ाओ या अंग्रेजी बोलना न सिखाओ। सब सिखाओ पर इस सब में अपनी मातृभाषा को मत भूलो ।
आज का युग कंप्यूटर का युग है और बच्चे आंख खोलते ही मोबाइल के प्रेमी होते दिखाईदे रहे हैं और वे अंग्रेजी टंकण में गुरूर करते हैं पर हमें उन्हें यह बताना है कि हिंदी में भी जब टंकण हो सकता है तो उसका उपयोग करो और उसका मान बढ़ाओ ।हिंदी शब्दों को हम कैसे विभिन्न मात्राओं सजा सकते हैं ऐसे अंग्रेजी को नहीं सजा पाते ।हिंदी को हमें अपनी बोलचाल की भाषा में अधिक से अधिक लाना होगा । घरों में अभिभावक अपने बच्चों से हिन्दी में बात जरूर करें और विद्यालयों में शिक्षक को हिंदी में बात करना चाहिए आपस में बच्चों से छात्रों से तभी हमारी मातृभाषा का महत्व बरकरार रह पायेगा बढ़ पायेगा नहीं तो दिन व दिन क्षीण होता जायेगा और हम बस एक सप्ताह हिंदी के नाम पर याद रखेंगे और वाकि पूरा साल अंग्रेजी ले जायेगी ।
अब तो हमारी सरकार ने कार्यालयों में भी हिंदी भाषा अनिवार्य कर दी है और प्रशिक्षण भी दिया जाते हैं इस के लिए ।और नौकरी के आवेदन पत्र व साक्षात्कारों में भी हिंदी का उपयोग बढ़ाया जा रहा है ।
अंततः यही कहना है कि हिंदी मातृभाषा व राज्यभाषा के राष्ट्रीय भाषा भी हो इसके लिए हमें बहुत प्रयत्न करना होगा ।हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग ही हिंदी का महत्व बढ़ायेगा ।

डॉ सुषमावीरेंद्र खरे
सिहोराजबलपुर मध्यप्रदेश

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