काव्य भाषा : न पूछो – आर एस माथुर इंदौर

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न पूछो

जीवन का आधार न पूछो
कब हो नैया पार, न पूछो

तुम जीतोगे मैंने माना
लेकिन मेरी हार ना पूछो

फूलों से रस्ता भर दूंगा
मैं चुनता हूं खार न पूछो

धरती पर जो बरस गए हैं
बादल कितनी बार न पूछो

हल्का समझ उठाना सीखा
कब है जीवन भार न पूछो

जगह-जगह चोटें चेहरे पर
किसने दी ये मार न पूछो

आर एस माथुर
इंदौर

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