लघुकथा : खालीपन – हेमलता शर्मा भोली बेन ,इंदौर

187

लघुकथा-

खालीपन

“नानू अब अपने आंगन में पहले की तरह पंछी क्यों नहीं आते!” नंदी रिया ने मासूमियत से ही अपने नाना से प्रश्न किया ना ना नहीं प्रति प्रश्न करते हुए पूछा- “अच्छा रिया बेटी यह बताओ कि तुम पिछले तीन सालों से ही यहां क्यों नहीं आई?”
“क्योंकि नानी के जाने के बाद यह घर हमें सूना लगता है,उनके बिना इस घर में खालीपन लगता है ।” रिया ने उसी मासूमियत सही जवाब दिया ।
“बस बेटी, यह पंछी भी अपनी दाना- पानी देने वाली मां यानि कि तुम्हारी नानी के बिना खालीपन महसूस करते हैं, उन्हें भी यह घर सूना लगता है, इसीलिए नहीं आते ! जब उन्हें एहसास होगा कि मैं भी अकेला हूं तो आने लगेंगे !” कहकर नानाजी आंखों में आए आंसुओं को छिपाने की भरसक कोशिश करते हुए उठकर चले गए । नन्ही रिया नानू को जाते देखती रही, उसे उनकी बातों का मर्म समझ नहीं आया था, किन्तु पास ही खड़ी यह सब देख-सुन रही रिया की मां ग्लानि से भर उठी ।

हेमलता शर्मा भोली बेन
इंदौर मध्यप्रदेश

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here