देश की स्वतंत्रता की 76 वीं वर्षगांठ और हमारे देश की गरिमा -राजीव कुमार झा,इंद्रपुर

लेख : देश की स्वतंत्रता की 76 वीं वर्षगांठ और हमारे देश की गरिमा

राजीव कुमार झा,इंद्रपुर

भारत में ब्रिटिश शासन खत्म होने के बाद यहां लोकतांत्रिक शासन की शुरुआत हुई . इसमें सारे देश के लोगों की भागीदारी है लेकिन अभी भी हमारे देश में शासन की प्रक्रिया में गरीब , पिछड़े और वंचित तबकों के लोगों की व्यापक भागीदारी का कायम होना बाकी है और तभी सच्चे मायनों यहां लोकतंत्र कायम हो
सकता है ! हरेक साल स्वतंत्रता दिवस हमें इसकी याद दिलाता है.
भारत में बहुदलीय लोकतंत्र है और यहां सदन में अर्थात राज्यों की विधानसभा और संसद है,
जनता के सारे प्रतिनिधि इनमें रद्द सत्तारूढ़ दल के अलावा विपक्ष के सदस्य भी होते हैं, सब मिलजुल कर मिलजुल कर कानून बनाते हैं.इसमे सारे सदन की सहमति होना जरूरी है. लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के साथ इससे जुड़े उत्तरदायित्व पूर्ण पदों पर आसीन लोगों में भी कार्य और चिंतन की गरिमा का होना जरूरी है . देश में भ्रष्टाचार की समस्या के संदर्भ में यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है . स्वतंत्रता आंदोलन का लक्ष्य देश में विदेशी शासन की लूट खसोट को खत्म करना था और इस बात को आज फिर रेखांकित करने की जरूरत है कि देश में शासन और सत्ता में लिप्त लोगों में स्वार्थ लिप्सा की भावना का समावेश नहीं हो और सारे दल के लोग देश सेवा का व्रत ग्रहण करें . लेकिन आज राजनीतिक जीवन के आदर्शों और मूल्यों में सभी लोगों के जीवन में इससे काफी दूरी बनती दिखाई देती है और यह सबसे चिंताजनक बात है . स्वतंत्रता दिवस देश को विकास के पथ पर अग्रसर होने का संदेश देता है और हमारा देश आधुनिक विकास के धरातल पर आज भी काफी पिछड़ा है . यहां कई क्षेत्रों में विज्ञान और तकनीक की उन्नति नहीं हो पायी है और युद्ध से संबंधित रक्षा उपकरणों के निर्माण के मामले में हमारा देश आज भी काफी पिछड़ा है .इन सभी क्षेत्रों में उन्नति होनी चाहिए और स्वस्थ सामाजिक परिवेश के निर्माण पर भी सबको ध्यान देना चाहिए . महिलाओं और बच्चों का कल्याण सबके स्वभाव और संस्कार का गुण धर्म बने यह स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा संदेश है!

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