काव्य भाषा : तिरंगा – व्यंजना आनंद ‘ मिथ्या ‘ बेतिया , बिहार

तिरंगा

लगे तिरंगा , सुंदर आज ।
हम सबको है , इसपर नाज ।।
इसकी खातिर , देते जान ।
सीमा के वें ,वीर जवान ।।

कड़क सर्द को, सहकर रोज ।
फैलाते चहुँ , स्वर्गिक ओज ।।
वीर बढ़ाते , जिसका मान ।
कहते उसको , हिन्दुस्तान ।।

त्याग भावना , गेरू संग ।
शांति सिखाता , उजला रंग ।।
उर्वरता के ,गुण को धार ।
हरे वर्ण में , शांति अपार ।।

कण – कण सोना, उपजे देख ।
बदल रही अब , किस्मत रेख ।।
कृषक मेहनत , करते संग ।
देख अचंभित , सब यह रंग ।।

सुंदर लगता , चक्र अशोक ।
सदा सिखाता , गलती रोक ।।
आसमान का , नीला भाव ।
सत्य धार ले , भरते घाव ।।

मनुष्यता के , गुण चौबीस ।
मिटा रहे हिय , सारे टीस । ।
चक्र गुणों में , है भरपूर ।
बढ़ता झंडा, का है नूर ।।

नमन करो हे , कर सम्मान ।
बढ़ती झंडे , से है शान ।।
सैनिक बन कर , बन रखवाल ।
रखो सदा अब , हृदय विशाल ।।

कुर्बानी को , रखना याद ।
वीर पुरुष बन , करले नाद ।।
गलत दृष्टि को , आकर फोड़ ।
दुश्मन बल को , मिलकर तोड़ ।।

व्यंजना आनंद ‘ मिथ्या ‘
बेतिया , बिहार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here