काव्य भाषा : आ गया रक्षा का बंधन – अरविन्द अकेला , पटना-27

आ गया रक्षा का बंधन

आ गया रक्षा का बंधन,
रक्षाबंधन का अनुपम त्योहार,
बहना बाँधती राखी भैया को,
भाई देता आशीष हजार।
आ गया रक्षा का बंधन…।

यह अनुपम संस्कार सनातन का,
इसमें छिपा पवित्र सद्विचार,
भाई-बहन के रिश्तों को यह जोड़ता,
देता रिश्तों को पवित्र आधार।
आ गया रक्षा का बंधन… ।

कुमकुम,चंदन,इस पर्व को भाते,
राखी कलाई की शोभा बढ़ाते,
आज खुश है देवों का देवलोक,
देखकर भाई-बहन का प्यार।
आ गया रक्षा का बंधन…।

राखी सिर्फ धागा नहीं है,
इसमें छिपा उत्तम संस्कार,
भाई देता एक बचन बहना को,
तेरी रक्षा का लेता हूँ मैं भार।
आ गया रक्षा का बंधन…।

आज खुश सभी भाई-बहना,
दोनों समाज के रत्न व गहना,
भाई-बहन को खुश रखना हे ईश्वर,
देना दोनो को खुशियाँ बेशुमार।
आ गया रक्षा का बंधन…।

आज अनुपम कलाई है भाई का,
अनुपम लग रहा अपना घर-द्वार ,
आज हर्षित सपरिवार हमारा,
हर्षित यह सारा संसार।
आ गया रक्षा का बंधन…।

अरविन्द अकेला
पटना-27

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