लघुकथा : गीत हृदय के – डाक्टर अनिता जैन ’विपुला’ उदयपुर

लघुकथा

गीत हृदय के

“आजकल कैसे–कैसे कवि हैं न मात्रा का ज्ञान है, ना लघु गुरु की पहचान” अपने आपमें एक पारंगत कवि का दंभ भरते हुए उन्होंने एक नवोदित कलमकार को डपटा।
नवोदित बोला मैं तो मां शारदे की आराधना करके जो भाव अंतःकरण में आते हैं वही लिख देता हूं।
इस पर भड़कते हुए तथाकथित बड़े कवि ने कहा–केवल लय ताल से कुछ नहीं होता , बस जो मन में आया गा दिया। शब्दकोश, छंद शास्त्र तो पढ़ लेता।

अब शुष्क हृदय उन महानुभाव से कौन पंगा ले। गीत हृदय के गाने वाले अकसर अपना मन मसोस कर रह जाते और तथाकथित पंडित कविराज यगण भगण में ही मगन रहते हैं।

डाक्टर अनिता जैन ’विपुला’
उदयपुर।

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