काव्य भाषा : हौंसला -सरस्वती कुमारी पटना

हौंसला

हौसलों में जो उड़ान होती है,
कहां किसी से नाफरमान होती है,
अपने हौसले पर अगर तुम्हें यकिन है,
तो बुलंदियों से तेरी पहचान होती है।

मेहनत से बस तुम पिछे न हटना,
वक्त की कीमत को रटना,
कदम न डगमगाए तेरे,
तो फिर पैरों तले गुलिस्तान होती है।

आज किसी और का है तो कल तेरा होगा,
हर अंधकार का सवेरा होगा,
खुद पर बस यकिन रख लें तूं,
कल का सवेरा बस तेरा ही तेरा होगा।

हौसलों में जो उड़ान होती है,
कहां किसी से नाफरमान होती है।

सरस्वती कुमारी पटना

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