अनाथो का नाथ है काशी विश्वनाथ – पं. विनोद दुबे

श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर में चल रहा है ज्योर्तिलिंग पूजन एवं अभिषेक

इटारसी 06/08/2022
श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर लक्कड़गंज इटारसी में निरंतर द्वादश ज्योर्तिलिंग अभिषेक और पूजन महोत्सव हो रहा है।
मुख्य आचार्य पं. विनोद दुबे ने बताया कि यह प्राचीन तीर्थ स्थान वाराणसी कहलाता है। क्योंकि यह वारूषी और अस्सी नदियों का संगम स्थल है जो गंगाजी का मिलन केंद्र है। बनारस के अलावा इस नगरी का नाम काशी भी है। यहां पहले काश जाति के लोग रहते थे।
उन्होनंे कहा कि काशी नगरी मोक्ष का प्रकाश और ज्ञान दात्री है। यहां के निवासी किसी भी तीर्थ स्थान की यात्रा किए बिना ही मुक्ति के हकदार हो जाते है। काशी में जिनके प्राण जाते है उन्हें मोक्ष मिलता ही है और यहां पर किए गए सत्कर्त कई कल्पों तक समाप्त नहीं होते है।
यहां देवती भी मृत्यु की कामना करते है वैसे तो बनारस में करीब 1500 मंदिर है लेकिन काशी के मंदिर में विश्वनाथ मंदिर का शिखर 100 फिट ऊँचा है।
हिंदू महारानी और होल्कर राजवंश की अद्वितीय प्रतिभा अहिल्यादेवी ने काशी विश्वनाथ मंदिर का कार्य पूर्ण कराया। काशी के बारे में कहा जाता है कि पूरी दुनिया प्रकृति विनाश में चली जावे लेकिन काशी बची रहेगी।
काशी के संरक्षक का दायित्व काल भैरव और दंडपानी निरंतर निभा रहे है। मुस्लिम शासकों ने कई बार काशी को बर्बाद और तवाह करने का प्रयास किया उन्होंने कई धार्मिक स्थलों को हानि पहुंचाई लेकिन भक्तों ने काशी को फिर खड़ा कर दिया। काशी विश्वनाथ से प्रसन्न होकर महाराजा रंजीत ंिसह ने मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित कराया। काशी वेदकाल से ही ओजस्वी चली हा रही है। अंग्रेजो और मराठो के शासनकाल मंे बनारस का वैभव निंरतर बढ़ा। जैन और बौद्ध धर्मियो ने इस तीर्थ स्थान के वैभव को चार चांद लगा दिए। काशी के पवित्र स्थान की यात्रा कर भेट देने के लिए हिंदू श्रद्धालु यहां आते है। अनेक धार्मिक कार्य संपन्न करके वह स्वयं को धन्य मानते है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों के अनेक धर्म के अनुयायी यहां आकर काशी विश्वनाथ के दर्शन करते है कई विदेशी भी मोक्ष पाने के लिए काशी आते है। काशी क्षेत्र और विश्वनाथ ज्योर्तिलिंग विश्व का अति पवित्र श्रद्धा स्थान है। यहां पर गंगोदत भू-लोक का अर्मत है। काशी विश्वनाथ का ज्योर्तिलिंग दुनिया में अनूठा और अदभुत है काशी के समीप ही गंगा धनुष के आकर ही हुई है इसका वैभव वैदिक काल से चला आ रहा है।

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