संत तुलसीदास समसामयिक, सार्वकालिक व सार्वभौमिक कवि-डाक्टर तिवारी

संत तुलसीदास समसामयिक, सार्वकालिक व सार्वभौमिक कवि-डाक्टर तिवारी

लोरमी छत्तीसगढ़ ।
संत तुलसी चौक स्थित मानस मंदिर मे मानस समिति सारधा द्वारा आयोजित दो दिवसीय तुलसी जयंती के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप मे बोलते हुए प्रेरणा हिन्दी प्रचारणी सभा के प्रान्तीय संयोजक डॉक्टर सत्यनारायण तिवारी हिमान्शु महाराज ने संत तुलसीदास जी को उनकी 525वी जयंती पर नमन करते हुए उन्हे समसामयिक, सार्वकालिक व सार्वभौमिक कवि बतलाया।डाक्टर तिवारी ने संत तुलसी के द्वादश ग्रन्थ गीतावली, दोहावली, विनयपत्रिका,जानकी मंगल,पार्वती मंगल ,बरवैरामायण,रामलला नहछु, आदि कृतियो मे श्रीरामचरित मानस सर्वाधिक लोकप्रिय कृति है।अनन्य श्रीरामभक्त तुलसी के काव्य मे अद्भुत समन्वय तथा संसार के समस्त प्राणियो के कल्याण का वर्णन किया गया है।इनकी रचनाओ की पृष्ठभूमि आत्मकल्याण, जनकल्याण तथा विश्व कल्याण समाहित है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रीरामचरित मानस सुंदरकांड तथा हनुमान चालीसा एवं प्रतिभागी छात्र छात्राओ को पुरस्कार प्रदान किया गया। उक्त अवसर पर आचार्य पंडित अनिरुद्ध शुक्ल, बुधराम चन्द्रसेन, गजानन सिंह, उमेदा साहू,रामनाथ राजपूत,राजेन्द्र सिह,टीकाकार,बराती साहू,बसंत चन्द्रसेन ,ऋषि चन्द्रसेन, बलवंत सिंह तथा कुन्तीदेवी साहू ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।डॉक्टर तिवारी शासकीय बालक/कन्या पूर्व माध्यमिक/प्राथमिक विद्यालय डिण्डौरी के संयुक्त तत्वावधान मे आयोजित तुलसी जयन्ती समारोह मे बोलते हुए “प्रातकाल उठिकै रघुनाथा।मातु पिता गुरू नावहि माथा।चौपाई की व्याख्या करते हुए जीवन मे माता, पिता तथा गुरू की भूमिका पर प्रकाश डाला।उन्होने श्रीरामचरित मानस को जीवन संहिता बतलाते हुए इसका निरंतर अध्ययन करते रहने का आग्रह किया।उक्त कार्यक्रम मे शिक्षक जलेशराम पटेल, मनोज ध्रुव, सुरेश ध्रुव, भोलेश्वर जायसवाल, रामकुमार मार्को, मणिशंकर तिवारी,सुनीता सिन्द्राम, कविता ऊइके,शैलकुमारी पटेल, सावित्री यादव, तथा राजेश्वरी वंशकार ने भी संत तुलसी के बारे मे अपने विचार व्यक्त किए।

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