राज्याभिषेक से प्रसन्नता और वनवास में दुख के परे हैं तुलसी के राम : डॉ.दीक्षित

राज्याभिषेक से प्रसन्नता और वनवास में दुख के परे हैं तुलसी के राम : डॉ.दीक्षित

तुलसी शोध संस्थान में “तुलसी जयंती समारोह” संपन्न

चित्रकूट।
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की जनजातीय लोककला एवं बोली विकास अकादमी के अंतर्गत संचालित तुलसी शोध संस्थान, चित्रकूट में तुलसी जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित की जाने वाली श्रृंखला के अंतर्गत *तुलसी जयंती समारोह* का आयोजन *दिनांक 4 एवं 5 अगस्त 2022 को प्रतिदिन संध्या 5:30 बजे से* संपन्न हुआ।
गतिविधि तुलसी भवन, तुलसी शोध संस्थान, नयागॉव, चित्रकूट के वातानुकूलित सभागार में आयोजित ‘‘भक्ति की बहुआयामी दृष्टियां’’ के मुख्य विचार के अंतर्गत इस विशेष अवसर पर *तुलसी के राम* विषय पर केंद्रित व्याख्यान की प्रस्तुति वरिष्ठ साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापक हिंदी विभाग डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित के साथ प्रोफेसर पवन अग्रवाल, लखनऊ का सारगर्भित व्याख्यान आयोजित हुआ। डॉ दीक्षित ने तुलसी के राम को व्याख्यायित करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि तुलसी के राम हमें तीन प्रभागों में विभक्त होते हुए दिखाई देते हैं। प्रथम जनतारक, द्वितीय सुख और दुख से परे और तीसरे स्वरूप में मर्यादा पुरुषोत्तम। अपने राज्याभिषेक के लिए मंगल प्रस्थान करते समय उन्हें मार्ग में ही वनवास की सूचना प्राप्त होने पर वह सहज भाव व्यक्त करते हैं, जैसे कुछ खोने का न कोई दुख है और ना ही दुखों के प्रतीक वनवास से कोई विचलन।
डॉ पवन अग्रवाल ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वे जन के साथ साथ मुख्य रूप से जनजातीय समुदाय को अधिक करीब से देखने और उनके उद्धार हेतु सदैव तत्पर प्रतीत होते हैं।
भक्ति गायन संध्या के रूप में मराठी में रचित *गीत-रामायण की हिंदी संगीतमय प्रस्तुति ख्यात गायक अमृता-अभय माणके इंदौर* द्वारा संपन्न हुई। गीत रामायण की विशेषता है कि इसके सभी पद्य विभिन्न भारतीय रागों में तैयार किए गए और वह रामचरित की विभिन्न घटनाओं को उन्हीं रागों से साकार कर देते हैं। इस सत्र का संचालन प्रोफेसर अवधेश प्रसाद पांडे रीवा द्वारा किया गया तथा अतिथियों का स्वागत शोध संस्थान के निदेशक श्री अनिल कुमार द्वारा किया गया।
गतिविधि के *दूसरे दिन वरिष्ठ साहित्यकार एवं कथाकार श्री कैलाश मंडलेकर और श्री गोविंद गुंजन खंडवा का व्याख्यान* प्रस्तुत हुआ। श्री मंडलेकर ने अपनी बात रखते हुए उनकी विशिष्ट व्यंग्य शैली पर आधारित वक्तव्य दिया, जिसमें राम और तुलसी की विस्तृत व्याख्या की गई। द्वितीय वक्ता श्री गुंजन ने रामकथा के वैविध्य पर विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया।
श्री उपम पटेल एवं समूह, सीधी द्वारा बघेली में राम के गीतों की लोक शैली में प्रस्तुति हुई इसमें उन्होंने रामचरित के विभिन्न प्रसंगों पर तैयार किए गए लोक गीतों को अपनी शैली में प्रस्तुत किया। जिसे सभी ने बहुत सराहा। विशेष रुप से दृष्टि विद्यालय कि दिव्यांग छात्राओं द्वारा तुलसी के पदों का गायन और बाल ग्रामोत्थांन सेवा संस्थाटन कामता चित्रकूट द्वारा महन्तत प्रेम पुजारीदास माध्यरमिक विद्यालय, जामुनडाड़, बरौधा विद्यालय के छात्रों द्वारा विभिन्न भक्ति गीतों की प्रस्तुति भी हुई। सत्र संचालन डॉ कमलेश थापक ने किया।
सभी के प्रति आभार कार्यक्रम अधिकारी दीपक कुमार गुप्ता ने माना। इस समारोह में साधु सन्तों के साथ बुद्धिजीवियों और स्थानीय जनता की सहभागिता सराहनीय रही। तुलसी शोध संस्थान परिवार की ओर से जन सामान्य की उपस्थिति हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

निदेशक
तुलसी शोध संस्थान
चित्रकूट, सतना, मध्यप्रदेश

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