वृद्धाश्रम अभिशाप या वरदान पर परिचर्चा आयोजित

भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प की सुरभि मंडल की संयोजिका श्रीमती रिचा शाह द्वारा मंडल परिचर्चा का आयोजन सम्पन्न

सागर।
भारतीय शिक्षण मंडल महाकौशल प्रांत महिला प्रकल्प सुरभि मंडल की संयोजिका श्रीमती रिचा शाह द्वारा मंडल परिचर्चा आयोजित की गई, *परिचर्चा का विषय “वर्तमान समाज में वृद्धाश्रम अभिशाप या वरदान”* रखा गया है
सरस्वती वंदना श्रीमती आंचल गुप्ता द्वारा की गई। ध्येय मंत्र मनीषा जी ने और ध्येय वाक्य श्रीमती शोभा सराफ जी ने प्रस्तुत किया। संगठन गीत का पाठ श्रीमती आराधना रावत और श्रीमती ऋचा शाह द्वारा किया गया।डा०सरोज गुप्ता जी ने मण्डल परिचर्चा में अपना संदेश भेजा कि वृद्धाश्रम वरदान कभी नहीं हो सकता । माता पिता जिन्होंने पालपोस कर बड़ा किया,जब उनको सहारा देने की बात आयी तो सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम में भेज कर हम सुकून महसूस करें कि हमारे माता पिता अपने उम्र के लोगों की कम्पनी में रह रहे हैं इसलिए वृद्धाश्रम वरदान है। वृद्धाश्रम भारतीय संस्कृति के लिए अभिशाप है वरदान नहीं।युवा पीढ़ी बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश पलायन कर रही है।परिवार विघटन की कगार पर हैं, वृद्धों की परिवार में उपेक्षा, नई पीढ़ी द्वारा अपने पितृपुरुषों से तालमेल बिठा सकने में असमर्थता जैसे कारक वृद्ध व्यक्तियों को वृद्धाश्रम में शरण लेना मजबूरी है । वृद्धाश्रम वरदान कभी नहीं हो सकते। परिजनों के वृद्धाश्रम में रहने से परिवार के बच्चे उनके आशीर्वाद से वंचित रहते हैं। खुशियां छिनती हैं। पर्व उत्सव त्यौहारों में परिवार के बड़े बुजुर्गो से रौनक रहती है, बच्चे संस्कार सीखते हैं। इसलिए संयुक्त परिवार, कुटुंब परम्परा फिर से शुरू हो, वृद्धाश्रम बंद हों।
श्रीमती प्रभा श्रीवास्तव जी का कहना है कि सरकार द्वारा वृद्धाश्रम के लिए अनिवार्य नियम निर्धारित होना चाहिए, जिनमें मेडिकल परीक्षण, पौष्टिक और सुपाच्य आहार उम्र के अनुसार शारीरिक और मानसिक श्रम होना चाहिए।
श्रीमती शोभा सराफ जी ने कहा.. भारतीय संस्कृति में माता पिता देव तुल्य माने जाते हैं मां ईश्वर का प्रतिरूप है आज के वर्तमान समय में पैसों की चमक ने सभी संस्कारों को विलुप्त कर दिया. तभी तो वृद्ध आश्रम का नाम पल्लवित पुष्पित हो रहा है माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़कर गर्व का अनुभव करते हैं और पत्थर के भगवान को पूछते हैं जो समर्थ हैं उन्हें यथा योग्य अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए यही जीवन का सार है…
श्रीमती विनीता राजपूत जी ने कहा कि भगवान गणेश ने शिव जी और पार्वती जी की परिक्रमा करके यह बताया कि माता पिता का मूल्य संपूर्ण ब्रह्मांड से भी अधिक है यह आज की युवा पीढ़ी को सीखना बहुत आवश्यक है।
डॉ प्रीति शर्मा जी ने वृद्ध को माली कहा है जो परिवार के सदस्यों को पोधों के समान सहेजता हैऔर आनंदित होता है।श्रीमती आंचल गुप्ता जी ने कहा कि आज संस्कारित जीवन शैली की बहुत आवश्यकता है यह हमें आधुनिक और पाश्चात्य संस्कृति के बीच हमारे दायित्वों को भूलने नहीं देती।श्रीमती आराधना रावत जी ने कहा कि वृद्ध आश्रम अभिशाप ना होकर वरदान सिद्ध हो रही है आजकल की सोच के अनुसार माता पिता संसार के समस्त सुखों का भोग करें और अपने जीवन को पूर्णता करें वृद्धावस्था अपने परम सुख अनुभूति की अवस्था है।श्रीमती रंजना, डॉ कृष्णा गुप्ता सभी ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की सुव्यवस्थित संचालन श्रीमती शशि दीक्षित जी ने किया। श्रीमती ऋचा शाह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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