काव्य भाषा : आजाद – ममता वैरागी , तिरला धार

आजाद

मेरे झाबुआ का समझो मेरा भाई।
जिसके पिता और मेरे पिता का नाम भी ऐक आई।
गर्व होता,मै वहाँ की,जहां चंद्रशेखर।
आजाद भारत का आजाद बेटा, और आजाद कहलाई।
वाह गजब साहस था ,उसमे, नाम आजाद रख लिया।
अंग्रेजो के छक्के छुडाएं, और कमाल कर दिया।
हाथ नही वह आया ,भाई, वह तो हिम्मती इतना।
खूद ही सीना तान जी लिया, खूद ने मौत बुलाई।
मां पिता का एकलौता सपुत, नाम रोशन कर गया।
मेरे गांव का मेरे जिले को महान बना गया।
लाल हो तो ऐसा ,जिसका नाम चंद्र और शेखर।
जो चांद सा शीश.पर बैठे, मां भारती हर्षित हो पाई।

ममता वैरागी
तिरला धार

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