जिंदगी के उतार चढ़ाव को अभिव्यक्त करती हैं कुन्ना चौधरी का संग्रह’जिंदगी है इसे बहने दो’रामेश्वरी’नादान’,गाजियाबाद

जिंदगी के उतार चढ़ाव को अभिव्यक्त करती हैं कुन्ना चौधरी का संग्रह’जिंदगी है इसे बहने दो’रामेश्वरी’नादान’,गाजियाबाद

समीक्षा -जिंदगी है इसे बहने दो
कवयित्री – कुन्ना चौधरी
प्रकाशन -बोधि प्रकाशन
मूल्य -150 रूपये
समीक्षक – रामेश्वरी’नादान’,गाजियाबाद

प्रसिद्ध साहित्यकार कुन्ना चौधरी जी मेरी मित्रता सूची में है. एक दिन उन्होंने मेसेंजर पर अपनी पुस्तक का लिंक भेजा. मुझे ख़ुशी हुई की उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर मुझे अपनी पुस्तक के बारे में बताया. साथ ही 50 रूपये का डिस्काउंट भी दिया.
मैंने भी उसी वक़्त पुस्तक ऑडर कर दी. एक हफ्ते के इंतजार के बाद पुस्तक हाथों में थी. सुंदर आवरण चित्र देखते ही पढ़ने की उत्सुकता जागी. आजकल अपने उपन्यास में व्यस्त हूँ तो जब-जब समय मिला दो चार रचनाएँ पढ़ती गई. कुन्ना चौधरी की ये दूसरी पुस्तक है. कुछ रचनाएँ बहुत अच्छी लगी. जो साहित्य क्षेत्र में उनकी कलम को धार देने में सक्षम है.बिना किसी भूमिका के उन्होंने सीधे अपनी बात कही है. काव्य संग्रह की पहली ही रचना आपके दिल में जगह बना लेती है.

जिंदगी है, इसे बहने दो
कुछ मर्यादा भी है निभानी
पर दिल को न सिसकने दो
जिंदगी है, इसे बहने दो
हार गए कुछ दांव-पेच तो क्या
औरों को खुश हो लेने दो
जिंदगी है, इसे बहने दो

जिंदगी के उतार चढ़ाव पर उन्होंने कुछ अन्य कवितायें भी लिखी है. कहते है लेखक जो भोगता है या अपने आस-पास देखता है वही लिखता है.कुन्ना जी ने भी यही सब अपनी रचनाओं में लिखा है. कहीं कहीं वो व्यक्तिगत भी हो जाती है. ये होना सम्भव भी है क्योंकि कवि अपने जीवन के उतार-चढ़ाव को शब्दों में पिरोकर काव्य का रूप दे देता है.
“ओ री सखी” दो सहेलियों की घानिष्टता परस्पर प्रेम की रचना है. “कोई नहीं है ” रचना में आज के दौर के स्वार्थी रिश्तों पर बुनी एक बेहतरीन रचना है. “काश कोई समझ पाता” “बदनामी “यादें तेरी “और “मुक्त मन” “जी,मैं भी कुछ करती हूँ ” नारी के स्वाभिमान और त्याग, प्रेम की रचनाएँ है.कुल मिलाकर एक पठनीय काव्य संग्रह है. भविष्य में हमें आदरणीया कुन्ना जी की और भी बेहतरीन रचनाएं पढ़ने को मिलेगी यही आशा करते हैं.

रामेश्वरी ‘नादान’
गाज़ियाबाद

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here