श्री हनुमान जी ब्रह्म की क्रियाशक्ति व श्रीराम की चितशक्ति -पं दुर्गाचरण शुक्ल

श्री हनुमान जी ब्रह्म की क्रियाशक्ति व श्रीराम की चितशक्ति -पं दुर्गाचरण शुक्ल

सुन्दरकाण्ड में हनुमत स्वरुप विषय पर तुलसी साहित्य अकादमी इकाई सागर द्वारा राष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न

सागर।

तुलसी साहित्य अकादमी इकाई सागर भुवनेश्वरी मंडल की संयोजिका श्रीमती आराधना रावत के सौजन्य से *”सुंदरकांड में हनुमत स्वरूप”* विषय पर आयोजित वेबिनार का शुभारंभ श्रीमती शशि दीक्षित द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। प्रोफेसर सरोज गुप्ता ने अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण देते हुए सुंदरकाण्ड को रामकथा का कल्पवृक्ष एवं कामधेनु के समान बताया तथा कहा कि आषाढ़ मास में हम सब हनुमत तत्व को समझें और हनुमान जी जैसा असाधारण बलवैभव सम्पन्न बनें।इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए गुरुदेव आचार्य पं दुर्गाचरण शुक्ल जी ने वेद की दृष्टि से हनुमानजी के अग्नि गर्भ वायु स्वरुप , वृषाकपि स्वरुप,उनके जन्म की घटनाएं तथा हनुमान जी के विशुद्ध परमब्रह्म रूप की क्रियाशक्ति श्रीराम की चितशक्ति के रुप को विस्तार से समझाया। इस सारस्वत अनुष्ठान की अध्यक्षता कर रहे पंडित प्रभुदयाल मिश्र ने श्री हनुमच्चरित पर अपने विचार ‘ज्ञानिनानां अग्रगण्यम’ सूत्र को केंद्र में रखकर प्रकट किए । वेद, वेदांग, भागवत, भाषा, व्याकरण और परिस्थिति के अनुरूप निर्णय तथा व्यवहार करने वाले हनुमान स्वयं भगवान राम के कथन के अनुसार सर्वोच्च ज्ञान की पराकाष्ठा हैं । श्री मिश्र ने वेद, वाल्मीकि रामायण, भागवत पुराण, गीता और रामायण के प्रमाण सापेक्ष अपने कथन में यह सिद्ध किया कि श्री हनुमान भारतीय मनीषा, विज्ञान और अध्यात्म के सर्वोच्च शिखर पर स्थित भगवान राम की ‘अनन्यता’ के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं । सारस्वत वक्ता श्री अवधेश नारायण तिवारी ने कहा कि हनुमान जी ने सुंदर काण्ड में अष्टसिद्धियों से सफलता प्राप्त की। डॉक्टर आरपी तिवारी ने कहा कि हनुमान जी अपने भक्तों के लिए साधन है, साधना है, साधक है हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए। डॉ उषा मिश्रा ने कहा कि सुन्दर कांड वास्तव में हनुमान जी का कांड है, हनुमान जी का एक नाम सुन्दर भी है। सुन्दरकाण्ड एक उत्तम, सकारात्मक, प्रभावशाली, सुखद परिणाम दायक,सफलता कारक, भगवान और भक्त की भक्ति और समर्पण की कथा है इसलिए पूरी रामायण में सुन्दर कांड को सबसे श्रेष्ठ माना गया है ।श्रीमती शोभा सराफ ने कहा अतुलित बल के धनी,रुद्रावतार पवन पुत्र हनुमान ने अपनी सूझबूझ संघर्ष क्षमता ,विनम्रता, सक्रियता और चतुराई से माता सीता की खोज की थी जो सुंदर पर्वत पर स्थित लंका नगरी में अशोक वाटिका है वहां जाकर सर्वप्रथम माता सीता से मुलाकात की,पहचान के लिए श्री रामचंद्र जी की मुद्रिका दिखलाई । यही वीर हनुमान की सफलता का रहस्य और इसी कारण इसको सुंदरकांड कहा गया है।श्रीमती शशि दीक्षित ने कहा हनुमान जी की सफलता का प्रतीक सुंदर कांड की सुंदरता का रहस्य संभवतः इस बात में निहित है कि सुंदर पर्वत पर स्थित अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान जी का मिलन हुआ था ।संपूर्ण रामचरितमानस भगवान राम के गुणॊ की गाथा है किंतु सुंदर कांड राम भक्त हनुमान गाथा है,यह हनुमान पर उनके प्रभु राम की कृपा है ।
श्रीमती आराधना रावत ने कहा जीवन को सुंदर बनाने का कांड सुंदरकांड है केवल सुख जीवन को सुंदर नहीं बना सकता यदि सुख के साथ शांति अर्जित की जाए तो ही जीवन सुंदर है यही हम सुंदरकांड के माध्यम से सीख सकते हैं । श्रीमती प्रीति शर्मा ने कहा किसी भी संकट के समय अपना मनोबल बनाए रखना एवं मस्तिष्क का संतुलन रखना यह हनुमान जी का विशेष गुण है लक्ष्मणजी जब शक्ति लगने से अचेत हुए तब हनुमान जी पूरा संजीवनी बूटी का पहाड़ उठा लाए क्योंकि उनके अंदर निर्णय लेने की असीम क्षमता है उनका यह गुण दिमाग को सक्रिय रखने के लिए प्रेरित करता है।श्रीमती आराधना रावत ने कुशल संचालन करते हुए कहा कि हम सभी के मन में प्रश्न उठता है कि सुंदरकांड क्या है? तो इसका समग्रता से यही उत्तर है कि जीवन सुंदर बनाने का नाम सुंदरकांड है, सुख के साथ अगर शांति है तभी जीवन सुंदर बन सकता है। तुलसी साहित्य अकादमी, भारतीय शिक्षण मंडल की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रीमती शोभा सराफ ने सभी के प्रति आभार माना।

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