काव्य भाषा : साहित्य का लक्ष्य – सुषमा वीरेंद्र खरे सिहोरा जबलपुर

साहित्य का लक्ष्य

साहित्य साधना कर हम जीवन उज्जवल कर पायेंगे।
लक्ष्य यही होगा साहित्य का समाज
सुशिक्षित कर पायेंगे ।।

1,हर समाज के कोने कोने में
प्रकाश किरण इसकी फैले
घर-घर में हो साहित्य की पूजा
संकल्प अगर हर कोई लेले ।।
रूढ़िवाद व अंधविश्वास को ,
तब तो मिटा हम पायेंगे ।
लक्ष्य यही होगा साहित्य का
समाज शिक्षित कर पायेंगे ।।

2, दृढ़ता का परिचय देकर ,
कलम को प्रखर बनालें जो ।
सत्य लिखें व सत्य ही बोलें
चलें सत्य के पथ पर जो ।।
तभी सफाया झूठ का होगा ,
गंगा साहित्य बहा पायेंगे ।
लक्ष्य यही होगा साहित्य का
समाज सुशिक्षित कर पायेंगे ।।

3, साहित्य हमारा जीवन है
साहित्य ही जीवन की धारा ।।
साहित्य बसा जिसके अंतस ।
वो होता है ईश्वर को प्यारा ।।
साहित्य की सेवा तनमन से कर
कोई लक्ष्य साध हम पायेंगे ।
लक्ष्य यही होगा साहित्य का समाज सुशिक्षित कर पायेंगे।।

4, साहित्य तो प्रसाद है ईश्वर का ।
कृपा से उनकी मिलता है ।।
जिव्हा में जिसकी सरस्वती विराजे
वही साहित्य लिख सकता है ।।
मां शारद को सदा मनाकर ।
लक्ष्य साधना कर पायेंगे ।
लक्ष्य यही होगा साहित्य का समाज सुशिक्षित कर पायेंगे ।।

सुषमा वीरेंद्र खरे
सिहोरा जबलपुर।

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