पत्रकार राठी ने अपना जन्मदिन बुजुर्गों के बीच मनाया

पत्रकार राठी ने अपना जन्मदिन बुजुर्गों के बीच मनाया

सिवनी मालवा।
शहर के वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने अपना जन्मदिन बुजुर्गों के बीच बनाया उन्होंने कहा कि खुद के लिए तो हर कोई जीवन जीता है, लेकिन कम ही लोग होते हैं, जो दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं। शहर के वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने अपने जन्मदिन पर शहर के वृद्धा आश्रम में सभी वृद्धजनों के साथ मनाया। जिससे वहां मौजूद वृद्धजनों में खुशी छा गई। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने कहा कि अपनों के प्यार से महरूम लोगों को सम्मान की जरूरत है, अपने जन्मदिन पर हमनें इसे इस तरीके से सेलिब्रेट करने का सोचा कि जो लोग अपनों के प्यार से महरूम और वंचित हैं, उन्हें जिस प्यार और सम्मान की जरूरत है, वह उन्हें मिल सके। यह वो सम्मान और प्यार है, जो उन्हें उनके अपनों के द्वारा नहीं मिला। इसलिए वृद्धा आश्रम में जन्मदिन मनाया, पता नहीं क्या वजह है कि हमारी संस्कृति में बुजुर्गों को बाहर निकाल रहे हैं। हमे अपने पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए वहे लोग प्रतिदिन हम कुछ न कुछ जीवन में सीखने बाली बातें बताते हैं। कहा कि बुजुर्गों के सम्मान के लिए कड़े प्राविधान और कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसी अवस्था में हमारे माता-पिता व बुजुर्गों को हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने माता-पिता की सेवा घर पर ही करें उन्हें कहीं छोड़े नहीं ।पत्रकार राठी ने अपना जन्मदिन बुजुर्गों के बीच मनाया,
सिवनी मालवा। शहर के वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने अपना जन्मदिन बुजुर्गों के बीच बनाया उन्होंने कहा कि खुद के लिए तो हर कोई जीवन जीता है, लेकिन कम ही लोग होते हैं, जो दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं। शहर के वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने अपने जन्मदिन पर शहर के वृद्धा आश्रम में सभी वृद्धजनों के साथ मनाया। जिससे वहां मौजूद वृद्धजनों में खुशी छा गई। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विनीत राठी ने कहा कि अपनों के प्यार से महरूम लोगों को सम्मान की जरूरत है, अपने जन्मदिन पर हमनें इसे इस तरीके से सेलिब्रेट करने का सोचा कि जो लोग अपनों के प्यार से महरूम और वंचित हैं, उन्हें जिस प्यार और सम्मान की जरूरत है, वह उन्हें मिल सके। यह वो सम्मान और प्यार है, जो उन्हें उनके अपनों के द्वारा नहीं मिला। इसलिए वृद्धा आश्रम में जन्मदिन मनाया, पता नहीं क्या वजह है कि हमारी संस्कृति में बुजुर्गों को बाहर निकाल रहे हैं। हमे अपने पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए वहे लोग प्रतिदिन हम कुछ न कुछ जीवन में सीखने बाली बातें बताते हैं। कहा कि बुजुर्गों के सम्मान के लिए कड़े प्राविधान और कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसी अवस्था में हमारे माता-पिता व बुजुर्गों को हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने माता-पिता की सेवा घर पर ही करें उन्हें कहीं छोड़े नहीं ।अधीक्षक श्याम बनकर, राहुल बाथब, दीपक यादव सहित उपस्थित रहे।

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