काव्य भाषा : साक्षात् देवदूत – सुलभा संजयसिंह राजपूत, सूरत गुजरात

चिकित्सक दिवस पर विशेष –

साक्षात् देवदूत

चिकित्सक साक्षात् धनवंतरी की संतान हैं,
जिनके समुद्र मंथन से अवतरण के प्रमाण है।
प्रतीत होता है अमृत कलश आपके हाथ है,
आप दुःख, पीड़ा में हर रोगी के साथ है।
ईश्वर के बाद आप दूसरे जीवनदाता है,
आपको संजीवनी खिलाने का हुनर आता है।
आपकी दृष्टि में निर्धन- धनी एक समान है,
आप धरा पर दूसरे भगवान है।
हम घरों में त्योहार मनाते हैं,
आप अस्पताल में कर्त्तव्य निभाते हैं।
आप , हमारे अपने,यही हकीकत है,
आजीवन हमें आपकी ज़रूरत है।
आप धरती पर अवतार स्वरूप आए हैं,
महामारी से अनगिनत मानव बचाएं है।
रहो चिरंजीवी, अनंतकाल तक हो बढ़ाई,
चिकित्सक दिवस पर अनेकानेक बधाई।

सुलभा संजयसिंह राजपूत,
सूरत गुजरात

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