माताएँ बच्चों को सूर्य उपासना एवं गायत्री मन्त्र से दीक्षित कर संस्कारी बनायें- योगाचार्य विष्णु आर्य

माताएँ बच्चों को सूर्य उपासना एवं गायत्री मन्त्र से दीक्षित कर संस्कारी बनायें- योगाचार्य विष्णु आर्य

भारतीय शिक्षण मण्डल महाकौशल प्रांत, महिला प्रकल्प सागर में अंतरर्राष्ट्रीय योग दिवस पर परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित

सागर।
भारतीय शिक्षण मंडल, महाकौशल प्रांत,महिला प्रकल्प सागर मध्य प्रदेश का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सुलोचना मंडल की संयोजिका श्रीमती शशि दीक्षित (मृगांक) के सौजन्य से -इंक मीडिया पत्रकारिता संस्थान सिविल लाइंस सागर में -“जीवन में योग और प्राणायाम की महत्ता एवं सार्थकता ” विषय पर परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।*शायर श्री अशोक मिजाज की पुस्तक श्रीराम कहानी डॉ उमाशंकर पचौरी व अतिथियों के द्वारा सम्मानित की गयी। डॉ सरोज गुप्ता ने स्वागत भाषण देते हुए महिला प्रकल्प की गतिविधियों की जानकारी दी। *मुख्य अतिथि श्रीमती अरुणा सारस्वत , अखिल भारतीय शिक्षण मंडल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष* ने कहा कि योग हमें अनुशासन सिखाता है जो मानवता के लिए परम आवश्यक है, आज के समाज की सबसे बड़ी समस्या है तनाव , जिसके निवारण के लिए एक मात्र माध्यम है योग । यह कार्य हमारी मातृशक्तियों की मूलभूत जिम्मेदारी है कि वे बच्चों में शैशवावस्था से ही  शरीर-मन को सशक्त, स्वस्थ्य और निर्मल बनाने हेतु  अनुशासन का पालन करवायें, उन्हें संस्कारी बनायें। *अखिल भारतीय महामंत्री भारतीय शिक्षण मंडल डॉ. उमा शंकर पचौरी जी* ने कहा कि योग मतलब नियमितता, नियमबद्धता और अनुशासन है, उन्होंने इसे भारतीय शिक्षण मंडल से जोड़ने का प्रयास किया , किसी भी संस्थान में उसके मूलभूत नियमों का पालन सर्वोपरि होता है।इस हेतु उन्होंने मंडल की कार्य प्रणाली पर प्रकाश डाला और उसे कठोरता से पालन कर आगे बढ़ने की सलाह दी। सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय शिक्षा गुरुकुल पद्धति से अलख जगा रही हैं। *मुख्य वक्ता योगाचार्य श्री विष्णु आर्य जी* ने कहा कि आज के समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए योग पर गहन, गंभीर भाषण की नहीं उसे अपनाने कि जरुरत है, सामान्य रूप से यदि आसन और प्राणायाम ही कर लिया जाये तो बहुत है पर यह किसी सिद्ध योगी के मार्गदर्शन मे ही करें तो उत्तम होगा। माताएँ अपने बच्चों को सात से नौ साल की उम्र से ही पूजापाठ ,सरल योग , सूर्य उपासना एवं गायत्री मन्त्र में यदि पारंगत करती हैं तो बच्चे का संस्कारी बनना सुनिश्चित होगा।*डॉ लता बानखेड़े* ने वक्तव्य देते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में प्रतिपादित कर भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने का अद्वितीय अद्भुत कार्य किया है*योग को अपने जीवन में उतारें ,विचारों का अनुलोम विलोम करें। बुरे विचार बाहर करें और अच्छे विचार अंदर करें, मन का पद्मासन करें, शरीर का वज्रासन करें और मुख का मुस्कुरासन करें,*योग करें और निरोग रहे*। *डॉ ऊषा मिश्रा ने योग के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा* कि योग दिवस एक दिन नहीं वरन् वर्ष भर जीवन में उतारें तभी सार्थकता होगी।*डॉ प्रीति शर्मा ने योग की प्राचीनतम पद्धति* का विस्तार से वर्णन किया। *राजश्री दवे ने योग की शिक्षा* बच्चों को बचपन में दी जाने की बात कही। *श्रीमती शोभा सराफ* ने कहा कि योग एक आध्यात्मिक अनुशासन और विज्ञान पर आधारित ऐसा ज्ञान है जो मन और शरीर के बीच सामंजस्य का कार्य करता है। *माधुरी राजपूत ने कहा* कि स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए हमें नियमित रूप से योग करना चाहिए, योग एक औषधि है। *पूनम मेवाती जी ने कहा* कि सिंधु घाटी सभ्यता में भी योग और समाधि को प्रदर्शित करती हुई मूर्तियां प्राप्त हुई हैं,भगवत गीता में योग के तीन प्रकार बताए गए हैं, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग। वंदना श्रीवास ने कहा कि योग: कर्मसु कौशलम अर्थात भारत की जो संस्कृति है वह कर्म प्रधान है।योग एक प्राचीन अनुशासन है यह मन,शरीर एवं बुद्धि में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ा कर मनुष्य के शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। *रुपा राज जी ने कहा* कि योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है ,यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है। मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है विचार, संयम और स्फूर्ति प्रदान करने वाला है। *पूजा केसरवानी ने कहा* कि नियमित तौर पर योगासन, प्राणायाम न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य को ठीक रखता है बल्कि शारीरिक और मानसिक बदलावों के समय संतुलन बनाने काम भी करता है।*विनीता राजपूत ने कहा* कि योग स्वयं की, स्वयं के माध्यम से, स्वयं की यात्रा है।रोज योग करें, हेल्दी और हैप्पी रहें, योग एक डांस है। *ज्योति दीक्षित ने कहा* कि चित्त को शांत करना ही योग है, योग हमारी शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक तीनों रुपों को स्वस्थ्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग एक ऐसा विज्ञान है जो हमें स्वस्थ्य और शारीरिक रुप से मजबूत होने का पूर्ण ज्ञान देता है यह हमारे लाइफ स्टाइल को एक सुंदर दिशा प्रदान करता है और हमें स्वस्थ्य व लम्बी जिंदगी देता है।*आराधना रावत ने कुशल संचालन करते हुए कहा* कि योग शरीर मन और आत्मा को जोड़ने का कार्य करता है योग से ही व्यक्ति निरोगी रहता हैयोग एक पूर्ण वैज्ञानिक विधि है जिसके द्वारा मनुष्य सुव्यवस्थित एवं आनंदमय जीवन व्यतीत कर सकता है। *डॉ आशीष द्विवेदी निदेशक इंक मीडिया,बीआई टी के प्राचार्य डॉ राजीव टंडन ,श्री अनुराग वृजपुरिया ,श्री सोनिक नामदेव,श्रीमती आशा लता सिला कारी, श्रीमती पूनम साहू रंजना चौरसिया, वसुंधरा गुप्ता,पल्लवी सक्सेना, डॉ कृष्णा गुप्ता, श्रीमती ज्योति राय और शिक्षण मंडल की सभी पदाधिकारियों* ने परिचर्चा में संवाद किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर *शशि दीक्षित ने* समस्त विद्वतजनों साहित्यकारों सुधीजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग मानव जीवन में एक चमत्कार जैसा है, बहुत से असाध्य रोग नियमित योग से ठीक हो जाते हैं।योग हमें जीवन जीने का सही ढंग सिखाता है। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को हम योगाभ्यास से प्राप्त कर सकते हैं। एक अति विशिष्ठ और ज्ञानवर्धक वक्तव्यों से भरे कार्यक्रम के लिए सभी मातृ शक्तियों को बधाई।

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