एक कौंध की तरह फूटती है कहानी- संतोष श्रीवास्तव

एक कौंध की तरह फूटती है कहानी- संतोष श्रीवास्तव

अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा कहानी संवाद का ऑनलाइन गूगल गोष्ठी के माध्यम से आयोजन

भोपाल।
प्रति मास होने वाले इस लोकप्रिय कार्यक्रम में देश-विदेश से लोग जुड़ते हैं और पढ़ी हुई कहानियों पर विमर्श करते हैं। कहानी विधा में यह एक ठोस और मजबूत पहल है जिसका आगाज अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच ने किया है।
संस्था की संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि, “कहानी एक कौंध की तरह फूटती है। सांकेतिक और क्षिप्र लय गति में ढाले जाने की मांग करती है।”
वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि बलराम गुमास्ता जी ने कहानी के विषय में चर्चा करते हुए बताया कि, “कहानी लिखने के लिए शून्य में सृजन करना होगा। कहानी में कला और विचार का सम्यक संतुलन होना चाहिए।”
आपने मीनाक्षी दुबे की कहानी, ‘कोहरा’ की सारगर्भित समीक्षा की। इस कहानी ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। सभी की आँखें नम हो गईं।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखक गोकुल सोनी जी ने मधुलिका सक्सेना की कहानी ‘उधार का मातृत्व’ और चरन जीत सिंह कुकरेजा की कहानी, ‘आखिरी सच’ की समीक्षा करते हुए कहा कि “कहानी भी चित्रकला जैसी होती है। इसके सारे रंग कैनवास पर साफ़ – साफ़ उभरकर दिखने चाहिए।”
विशिष्ट अतिथि शेफालिका श्रीवास्तव ने इस कार्यक्रम को कहानी के लिए एक जरूरी कार्यक्रम बताया और आदिति सिंह भदौरिया की कहानी, ‘आखिरी खत’, की समीक्षा करते हुए, “समाज में किन्नर के महत्व को रेखांकित किया।”
पच्चीस से अधिक श्रोताओं ने न केवल कहानीपाठ का आनंद लिया बल्कि विमर्श में भी बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया। एक समय ऐसा आया कि यह आयोजन कहानी की वर्क शाप के रूप में तब्दील हो गया। मुख्य रूप से वरिष्ठ कहानीकार राज बोहरे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
युवा कहानी कार अदिति सिंह ने कहानी के इस आयोजन को नए रचनाकारों के लिए कहानी की एक प्रयोगशाला के रूप में स्वीकार किया तथा उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का विद्वत्तापूर्ण संचालन मुजफ्फर सिद्दीकी ने किया तथा आभार संतोष श्रीवास्तव ने। महेश राजा ने अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए फोटो ग्राफी की।

– संतोष श्रीवास्तव,भोपाल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here