काव्य भाषा : विश्वास – सरस्वती कुमारी , पटना

विश्वास

प्रारम्भ रिश्ते का सिर्फ होता है विश्वास
पहली सीडी प्रेम की होता है विश्वास ।

जाना हो दूर तक एक दूजे के साथ
हाथमें तब लेना हाथ जब हो विश्वास ।

दोनो दिलो में चाहत तब बनती है
जगाता है एहसास रिश्ते मे विश्वास ।

अजनबी भी हो बन जाते है खास
बंधन बंधता है जब होता है विश्वास ।

अटूट अंखड साथ जब रहता है
वर्षो बरस रहे आपस में यह विश्वास ।

कितने भी हो भंवर पार हो जाते है
संकल्प हो साथ का मनमें हो विश्वास

संकट की घडी या कोई बिगडी बात
निकाल देता वक्त से आगे ये विश्वास

सरस्वती कुमारी
पटना

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