काव्य भाषा : वक्त – कीर्ति तोमर,दिल्ली

वक़्त

जो दुनिया में ताकतवर है,
जिसके रोम रोम में स्वर है ।
जिसको चाहे ये वही विजय,
जिसको चाहे वही पराजय ।
जिसको चाहे वही अजय है,
यही समय है यही समय है ।।

समय के ऊपर हाथ न कोई,
इसको गर रखे साथ न कोई।
अधिकार विजय को खोता है,
वो स्वीकार पराजय करता है।
जिसने कौरव को दिया पराजय,
यही समय है यही समय है ।।

© कीर्ति तोमर,दिल्ली

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