श्यामलम् के ‘भाषा-विमर्श’ कार्यक्रम में हुई अंग्रेजी पर सारगर्भित चर्चा

श्यामलम् के ‘भाषा-विमर्श’ कार्यक्रम में हुई अंग्रेजी पर सारगर्भित चर्चा

सागर के युवा लेखक कार्तिकेय शास्त्री के अंग्रेजी उपन्यास “द नाइट आउट” का हुआ विमोचन

अंग्रेजी और हिन्दी के प्रति आग्रह तो होना चाहिए, दुराग्रह बिल्कुल नहीं – दीपक तिवारी

सागर।
रविवार को सिविल लाइंस स्थित वरदान सभागार में श्यामलम् संस्था के विभिन्न भाषाओं पर केन्द्रित महत्वाकांक्षी कार्यक्रम “भाषा विमर्श” में अंग्रेजी भाषा पर सारगर्भित चर्चा हुई।इस अवसर पर दुबई में कार्यरत नगर के युवा और उदीयमान लेखक कार्तिकेय शास्त्री के अंग्रेजी उपन्यास “द नाइट आउट” का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेखक व वरिष्ठ पत्रकार, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति दीपक तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कार्तिकेय में बहुत संभावनाएं हैं।आशा है आने वाले समय में भी इसी तरह से और भी साहित्य सृजन करेंगे और एक समय सागर की पहचान उन जैसे युवा साहित्यकारों से होगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी के प्रति आग्रह तो होना चाहिए पर दुराग्रह बिल्कुल नहीं, क्योंकि अंग्रेजी आज विश्व को जोड़ने वाली भाषा है। भारत में भी सबसे अधिक यदि रोजगार सृजन हो रहा है तो अंग्रेजी के माध्यम से ही है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अंग्रेजी के विद्वान वक्ता प्रो.विनीत मोहन औदिच्य ने कहा कि इस उपन्यास में सभी अनिवार्य तत्वों का सफलतापूर्वक लेखक ने समावेश किया है जिससे यह उपन्यास अत्यंत रोचक कृति बन पड़ी है। कथानक कसा हुआ है जो निरंतर बांधें रखता है। भाषा सहज है और अंग्रेजी भाषा सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए आदर्श कृति। उन्होंने उपन्यास के कथानक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह इक्कीसवीं सदी के चार मित्रों के व्यवसाय, कार्पोरेट जगत, प्रेम जीवन और अपूर्ण आकांक्षाओं से उपजी कुंठा को उजागर करता है।
पुस्तक पर अपने समीक्षात्मक वक्तव्य में कथाकार डॉ.सुश्री शरद सिंह ने कहा चार दोस्तों के अनुभवों पर आधारित यह उपन्यास एक विनोदी, भावनात्मक और साहसिक यात्रा की तरह है जो पाठकों को दोस्ती, करियर के लक्ष्यों और सच्चे प्यार के पार और बहुआयामी रास्तों से ले जाती है। युवाओं के जीवन को समझने की दृष्टि से यह उपन्यास बहुत महत्वपूर्ण है या किसी भी दृष्टि से ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि किसी लेखक की पहली कृति है, पूरे उपन्यास में लेखन शैली भाषा और कथानक की दृष्टि से पूरी गंभीरता का आभास होता है। आलोचक टी आर त्रिपाठी ने अंग्रेजी में समीक्षा आलेख वाचन करते हुए पुस्तक पर विस्तार पूर्वक चर्चा की और उपन्यास को पठनीय बताया। विशिष्ट अतिथि अस्थि रोग विशेषज्ञ व लेखक डॉ मनीष झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
पुस्तक लेखक कार्तिकेय शास्त्री ने अपने लेखन कार्य के प्रति परिजनों द्वारा दी गई प्रेरणा और प्रोत्साहन को श्रेय देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
अतिथियों द्वारा मां सरस्वती पूजन व दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बुंदेली लोक गायक शिवरतन यादव ने मधुर सरस्वती वंदना की। कपिल बैसाखिया, हरी शुक्ला,आर के तिवारी, कनिष्क शास्त्री और पुष्पा शास्त्री ने अतिथि स्वागत किया। श्यामलम् अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने कार्यक्रम परिचय व स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का व्यवस्थित और सुचारू संचालन ईएमआरसी के प्रोड्यूसर मानव चंद्रा ने किया तथा रमाकांत शास्त्री ने श्यामलम् एवं शास्त्री परिवार की ओर से आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर लेखक कार्तिकेय शास्त्री का अभिनंदन आयोजक संस्था श्यामलम् सहित अन्य संस्थाओं लेखिका संघ, हिंदी साहित्य सम्मेलन,स्वर संगम, महिला काव्य मंच,पाठक मंच आदि ने पुष्पहार,शाॅल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र भेंट कर किया।
पी आर एस वेलफेयर सोसायटी अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। आयोजक संस्थाओं द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
इस अवसर पर डॉ श्याम मनोहर सिरोठिया, संतोष श्रीवास्तव विद्यार्थी, डॉ.आशीष द्विवेदी, सतीश पांडे, डॉ शशि कुमार सिंह, डॉ राम रतन पांडे, डॉ. गजाधर सागर,हरीसिंह ठाकुर, डॉ. चंचला दवे, सुनीला सराफ, नेहा चतुर्वेदी शास्त्री, डॉ.ऋषभ भारद्वाज, पीआर मलैया, अबरार अहमद, सुरेंद्र श्रीवास्तव ,डॉ.अतुल श्रीवास्तव, मानवेंद्र सिंह सेंगर, शुभम उपाध्याय,रमेश दुबे, मुकेश तिवारी, श्रीमती रचना तिवारी, अयाज अखलाक सागरी, डॉ.जी एल दुबे, एम डी त्रिपाठी, दामोदर अग्निहोत्री, डॉ. नलिन जैन, अंबिका यादव, डॉ नवनीत धगट, डॉ. छाया चौकसे, यशवंत जैन,के के पाठक, अशोक अलख, महेश प्रसाद मिश्र, एम एल चतुर्वेदी, नीरज मिश्र,कनिष्क शास्त्री, प्रियंक दीक्षित, कामेश शास्त्री, अविजित मिश्र, प्रियंक दीक्षित, मनीष दुबे,आदित्य मोहन, धारिणी मिश्र आदि ‌की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

डॉ चंचला दवे,सागर

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