सरोकार : किसी की ओर एक उंगली करोगे तो तीन उंगली तुम्हारी तरफ भी होंगी -इंजी. भारत भूषण आर गाँधी

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किसी की ओर एक उंगली करोगे तो तीन उंगली तुम्हारी तरफ भी होंगी

हमारे अपने शरीर में हाथ के पंजे की उँगलियों की बनावट के चलते किसी की ओर जब भी इशारा करने की मुद्रा में ऊँगली की जाती है जो सिर्फ इसलिए ईज़ाद हुई थी कि हम और आप उस दिशा की ओर इशारा कर सकें जिसे हम अपनी जुबान से नहीं बताना चाहते हैं. या जब हमारे पास अपनी बोलियाँ नहीं थीं और तब हम केवल इशारों से आपसी संवाद किया करते थे. मूक और बधिर हमेशा से इशारे के लिए उसी मुद्रा का ही तो इस्तेमाल करते हैं.
न जाने कब किस विद्वान ने इशारे की इस मुद्रा का ये अर्थ निकाल लिया था कि किसी की तरफ एक ऊँगली करोगे तो तीन ऊँगली तुम्हारी तरफ भी हो जाएगी. उस विद्वान ने भले ही जिस सन्दर्भ में कही हो सही तो लगती ही है.
लेकिन आजकल एक ऊँगली दूसरे की ओर करने और तीन उँगलियों का अपनी तरफ होने की इकोलॉजी बदल सी गई है. देखिये न किसी के बारे में कुछ बोलकर तो देखिए आजकल न जाने कितनी उंगलियाँ तुम्हारी तरफ उठने से ज्यादा तनी हुई दिखाई दे जाएँगी. इसका बाकायदा भरपूर चलन हो गया है जिसे सबसे ज्यादा उपयोग राजनीति और जातिवाद पर किया जा रहा है. धीरे धीरे ये आम लोगों की आदत भी बनता जा रहा है. उसका कारण यह भी है हमारे आसपास की इकोलॉजी ही इस प्रकार सी हो गई है कि किसी का भी दामन उजला नहीं बचा. यदि किसी ने भरपूर कोशिश करके बहुत कुछ साफ़ सुथरा रख लिया हो तो उसके रिश्ते नाते जाति पेशा कोई जो कुछ भी हाथ आ जाए उंगलियाँ तानने वाले तैयार हो चुके हैं.
सरकार चाहे तुष्टिकरण वालों की हो या कट्टर विचारधारा वालों की हो, मुश्किल में आम आदमी ही है. कभी कभी ऐसा लगता है कि एक भी ऐसा विभाग या सिस्टम हमारे देश में है नहीं जो सही काम कर रहा हो. फिल्मों में कभी कभी ऐसे संवाद सुनने को मिलते हैं जो लोगों की तालियों को जमकर बटोरते हैं और बरसों बरस याद किये जाते हैं. ऐसा ही एक डायलाग नाना पाटेकर का फेमस हुआ था कि देश में निन्यानवे बेईमान फिर भी हमारा देश महान. हालाँकि इस डाटा से मेरी कोई सहमति नहीं है लेकिन इतना जरुर है कि जो इमानदार है वो फ्रस्टेशन का शिकार है. इसलिए ऐसे भले लोगों को सलाह है कि वो फ्रस्टेशन का त्याग करें अपने बचपन के दोस्तों के साथ उठबैठ कर चुटकुलेबाजी करें, वर्ना ये दुनिया तुम्हें जीने नहीं देगी मरने नहीं देगी.

इंजी. भारत भूषण आर गाँधी
स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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