काव्य भाषा : तू तू – मै मै – तेजकरण जैन राजनांदगाँव

तू तू – मै मै

तू तू है
मै मै हूँ
अलग – अलग
फिर भी अलग अलग नही
मै और तू
*तू मै हूँ , मै तू हूँ*

नही है,हम दोनो के बीच
*तू तू मै मै*
क्योकिं खत्तम कर देते है
मै और तू
फासला – अलगाव
विषय – विकार
शायद इसलिये नही होती
हम दोनो के बीच
*तू तू – मै मै* की तकरार

एक नही हमारे विचार
फिर भी
हम दोनो जानते
कैसे देना है सम्मान
एक दुसरे के विचारो को
कैसे पूरी करना है जरूरते
बिना बोले एक दुजे की
शायद इसलिए नही होती
हम दोनो के बीच
*तू तू मै मै*

प्यार नही, नही दरार
बेकरार नही, नही करार
अपेक्षा और उपेक्षा से दूर
शायद इसलिए नही होती
हम दोनो के बीच
*तू तू मै मै*

-तेजकरण जैन
राजनांदगाँव
छतीसगढ

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