विश्व भाषा अकादमी तेलंगाना इकाई द्वारा परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न

विश्व भाषा अकादमी तेलंगाना इकाई द्वारा परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न

हैदराबाद।
विश्व भाषा अकादमी, भारत की तेलंगाना इकाई द्वारा परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। अध्यक्ष सरिता सुराणा ने सभी अतिथियों और सहभागियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। आर्या झा की सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। तत्पश्चात् परिचर्चा के लिए प्रदत्त विषय- क्या युद्ध से किसी भी समस्या का समाधान सम्भव है? इस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता श्रीमती सुनीता लुल्ला ने कहा कि युद्ध से समस्या का समाधान सम्भव नहीं है लेकिन जब संवाद की स्थिति समाप्त हो जाए तो युद्ध जरूरी हो जाता है। वर्तमान समय में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर बातचीत करने से पहले हमें थोड़ा पीछे जाकर इतिहास में झांकना पड़ेगा। उन्होंने महाभारत और राम-रावण के युद्ध से लेकर अमेरिका-वियतनाम युद्ध, अमेरिका-इराक युद्ध आदि के अनेक उदाहरणों द्वारा अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध एक तरह से ब्रह्मास्त्र है, जिसका उपयोग योद्धा लोग सबसे अन्त में करते थे। सरिता सुराणा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि युद्धों का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना मानव सभ्यता का इतिहास। पहले छोटे-छोटे कबीले आपस में लड़ते थे, बाद में राजा-महाराजा अपने साम्राज्य विस्तार के लिए युद्ध करने लगे। मैराथन का युद्ध 490 ईस्वी पूर्व ईरानियों और यूनानियों के बीच लड़ा गया था। 1066 ईस्वी में हेस्टिंग्स का युद्ध, नील नदी का युद्ध, प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध तथा ऐसे अनेक युद्धों की गाथाओं से विश्व इतिहास भरा पड़ा है। युद्ध से समस्याएं सुलझने की जगह उलझती हैं और सम्पूर्ण मानव जाति को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और प्राकृतिक नुकसान उठाने पड़ते हैं। विध्वंस करने में अत्यल्प समय लगता है लेकिन निर्माण में बहुत ज्यादा समय, श्रम और अर्थ की आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान रूस-यूक्रेन युद्ध सिर्फ दो तानाशाहों के अहम् की पुष्टि के लिए लड़ा जा रहा है, निर्दोष नागरिकों को जबरदस्ती उसमें ढकेला जा रहा है, यह गलत है।
कटक, उड़ीसा से विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित श्रीमती रिमझिम झा ने कहा कि युद्ध से किसी भी समस्या का समाधान सम्भव नहीं है। युद्ध के पश्चात् जीत चाहे किसी की भी हो लेकिन जन-धन की हानि के साथ मानवता की हानि होती है। श्रीमती भावना पुरोहित ने कहा कि श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध टालने के बहुत प्रयत्न किए लेकिन जब दुर्योधन 5 गांव देने के लिए भी राजी नहीं हुआ तो उन्हें युद्ध करना पड़ा। डाॅ. संगीता जी शर्मा ने कहा कि देश चाहे छोटा हो लेकिन शक्तिशाली के आगे कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। यूक्रेन के नागरिक देशभक्ति की भावना से रूस जैसी महाशक्ति का सामना कर रहे हैं, कायरों जैसे डरकर भाग नहीं रहे हैं। आर्या झा ने कहा कि उन्हें सभी वक्ताओं को सुनकर बहुत अच्छा लगा। आज की परिचर्चा गोष्ठी बहुत ही सार्थक रही। युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, बातचीत के द्वारा समस्या को सुलझाया जा सकता है। यह परिचर्चा वर्तमान समय में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के सन्दर्भ में विचार विमर्श करने के लिए आयोजित की गई थी।
द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें श्रीमती सुनीता लुल्ला ने बहुत ही सुन्दर ढंग से तरन्नुम में गज़ल प्रस्तुत की। श्रीमती भावना पुरोहित, श्रीमती रिमझिम झा, श्रीमती आर्या झा, डॉ. संगीता जी शर्मा और सरिता सुराणा ने समसामयिक विषयों पर कविता पाठ किया। वरिष्ठ पत्रकार के. राजन्ना भी गोष्ठी में उपस्थित थे। आर्या झा के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

रिपोर्ट:
सरिता सुराणा

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