महिला काव्य मंच की ऑनलाईन गोष्ठी सम्पन्न

महिला काव्य मंच की ऑनलाईन गोष्ठी सम्पन्न

सागर।
“महिला काव्य मंच” सागर इकाई की मासिक गोष्ठी रविवार 22 मई 2022 को गूगलमीट पर ऑनलाईन समपन्न हुई।गोष्ठी में 25 से ज्यादा प्रतिभागियों ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.रत्ना शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम में काव्य के तमाम रस और विचार देखने को मिले, अपनी कविता “चल सूरज आज तुझे घर ले चलूं” का पाठ करते डॉ. रत्ना ने बताया की किस तरह काव्य मंच से जुडने के साथ ही एक लम्बे समय बाद उन्होने पुन: काव्य लेखन शुरु किया है। सारस्वत अतिथि के रूप में श्रीमती रेणु शुक्ला सहगौरा ने साहित्य और समाज के आपसी जुडाव और प्रभाव पर विचार रखते हुए युवा रचनाकारों को अपनी अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करने के लिये “काव्य मंच” के प्रयासों की भूरी -भूरी प्रशंसा की , साथ ही विवाहोपरांत स्त्री जीवन में आये बदलावों पर अपनी कविता “आधा जीवन बीत गया” का पाठ किया,उन्होनें यह भी बताया कि काव्य मंच से जुडकर लगभग 24 वर्ष बाद उन्होंने पुन: कविता लिखने की शुरुआत की है। तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री सुमन झुडेले ने अपने गम्भीर,सारगर्भित वक्तव्य से युवा प्रतिभागियों का उत्साह बढाया साथ ही अपनी कविताओं और गज़ल के प्रस्तुतिकरण से काव्य मंच को एक नयी उंचाई प्रदान की। काव्य मंच की इस गोष्ठी में विशिष्ट आमंत्रित कवयित्री के रूप में “सभ्यता अध्ययन केंद्र” दिल्ली की संयोजिका श्रीमती शुभ्रा सिंह ने भी अपनी भावप्रधान कविता के माध्यम से मां की उंगलियों के एहसास से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आम महिलाओं को, युवतियों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करने के लिये शुभ्रा सिंह ने काव्य मंच सागर इकाई की प्रशंसा की।

गोष्ठी की शुरुआत श्रीमती राशि नामदेव द्वारा मां सरस्वती की सुमधुर वंदना से हुई, जिसके बाद महिला काव्य मंच सागर इकाई की अध्यक्ष प्रो. अंजना चतुर्वेदी द्वारा समस्त अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया गया। गोष्ठी में सुश्री शुभांगी ओखदे की कविता “अंधियारा” ने अंधेरे के प्रति सकारात्मक सोच रखने का अग्रह किया तो ,सुश्री अंजली सर्राफ जैन ने अपनी कविता के माध्यम से नारी को आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ जीने के लिये प्रेरित किया। , सुश्री महिमा नामदेव ने अपनी कविता के माध्यम से बेटी बचाओ का संदेश दिया साथ ही समाज को भी आईना दिखाया, तो सुश्री दीक्षा चढार ने अपनी गम्भीर कविता “कुछ स्त्रियां” के माध्यम से स्त्री के अस्तित्व को व्यापकता से देखने का अग्रह किया। चश्मे पर लिखी सुश्री तनु सरवैया की कविता ने सभी श्रोताओं को गुद्गुदाया तो सुश्री दीपाली गुरु ने अपनी कविता “गरीबी” के माध्यम से गरीबी से उपजे जीवन के अनुभवों का यथार्थ चित्रण किया। गोष्ठी में श्रीमती मेघा मिश्र,श्रीमती मनीषा पटेरिया,डॉ. अर्चना भार्गव , डॉ.अंजना चतुर्वेदी ने भी काव्य पाठ किया।
महिला काव्य मंच सागर इकाई की अध्यक्ष प्रो. अंजना चतुर्वेदी ने युवा प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए अपनी गोष्ठी के सफल आयोजन पर अपना हर्ष व्यक्त करते हुए कहा की यही आम लोगो को काव्य मंच से जोडना ही हमारा उद्देश्य है, और आज की गोष्ठी देखकर लगता है की हम अपने उद्देश्य पथ पर आगे बढ रहे हैं। काव्य गोष्ठी की अध्यक्ष डॉ. अर्चना भार्गव और महिला काव्य मंच सागर इकाई की उपाध्यक्ष डॉ. रश्मि दुबे ने गोष्ठी के अंत में अपने समीक्षकीय विचार रखे, उनके गहन विचारों से युवा प्रतिभागियों को काफी कुछ सीखने को मिला। गोष्ठी का संचालन काव्य मंच सागर की सचिव डॉ. सुजाता मिश्र ने किया , युवा प्रतिभागियों की प्रतिभा और रचना कौशल को देखकर उन्होने कहा की ऐसी तमाम प्रतिभाओं को सामनें लाने की आवश्यकता है, महिला काव्य मंच सदा इन्हीं छुपी हुई प्रतिभाओं को उभारनें के लिये सक्रिय रहेगा। गोष्ठी के सफलतापूर्वक आयोजन के लिये काव्य मंच की सह सचिव डॉ. अपर्णा चंचौदिया ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का हृदय से आभार प्रकट किया ।

डॉ.सुजाता मिश्र
(सचिव महिला काव्य मंच सागर)

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