सिक्त स्वरों के सॉनेट का लोकार्पण हुआ

सिक्त स्वरों के सॉनेट का लोकार्पण हुआ

सागर।
रविवार सायं 7 बजे सर्वभाषा ट्रस्ट की ओर से ऑनलाइन पुस्तक लोकार्पण समारोह रखा गया जिसमें कवि, सॉनेटियर तथा ग़ज़लकार विनीत मोहन औदिच्य के नवीन सॉनेट संग्रह सिक्त स्वरों के सॉनेट का लोकार्पण हुआ।
यह पुस्तक सर्वभाषा ट्रस्ट प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित हुई है एवं यह कार्यक्रम का अनुक्रमण प्रकाशक कवि तथा लेखक श्री केशव मोहन पाण्डेय के सौजन्य से रखा गया।
कार्यक्रम का संचालन कवयित्री लिली मित्रा ने अति कौशलता से एवं सुंदर शब्दों तथा अनुभवों से किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अथिति सुप्रतिष्ठित उपन्यासकार प्रताप नारायण सिंह ने प्रकाशक एवं प्रकाशन की मुक्तकंठ प्रशंसा करते हुए पुस्तक में आबद्ध सॉनेटस की विशेषताओं का वर्णन किया।
विभिन्न छंदों का उदाहरण देते हुए विनीत मोहन के सॉनेटस पर गुणात्मक टिप्पणी सहित भाव, कथ्य, सौंदर्य, अलंकार, बिम्ब, संवेग तथा उत्कृष्ट शब्दचयन के सुंदर प्रयोग की प्रशंसा की। आलोचित पुस्तक के तीन प्रभावी सॉनेटस का पाठ भी किया।

विशिष्ट अतिथि वीणा वशिष्ठ ने कथित पुस्तक में लिपिबद्ध सॉनेटस के भाव एवं कला पक्ष की प्रशंसा करते हुए कुछ चयनित सॉनेटस के अंश का भी पाठ किया। उन्होंने कहा कि कवि ने विदेशी विधा में लिखते हुए भी भारतीय संस्कृति एवं परिवेश का अर्थपूर्ण सम्मिलन किया है।

विशिष्ट अतिथि तथा सर्वभाषा ट्रस्ट के प्रकाशक तथा सुप्रसिद्ध कवि एवं लेखक केशव मोहन पाण्डेय ने अपनी अभिव्यक्ति में यह कहा कि विदेशी संस्कृति की झलक जब हमारे दैनंदिन जीवन में परिलक्षित होती है तो काव्य विधा में भी विदेशी विधाओं का संश्लिष्ट होना स्वागत योग्य है। सॉनेट विधा पर विशेष टिप्पणी देते हुए यह कहा की इस पुस्तक में साॅनेटियर विनीत मोहन ने ‘कागज़ लिखी नहीं आँखों देखी’ अर्थात सामाजिक सत्यता की भव्य रचना की है एवं अति सुंदर सॉनेट का पाठ करते हुए उन्होंने शिल्प एवं भाव की प्रशंसा की।

पाठकीय अभिमत देते हुए कवयित्री तथा सॉनेटियर आद. अनिमा दास जी ने कहा कि
प्रत्येक सॉनेट लयबद्धता एवं रूप कल्पों को लेते हुए ऐसे सृजित किए गये हैं कि सरल से सरल बोध एवं निहित संदेश का भी प्रतिबिम्ब दृश्यमान होता है। उन्होंने उदाहरण स्वरुप एक सॉनेट की व्याख्या भी की। शुभकामना संदेश के साथ उन्होंने निष्ठावान पाठक की प्रतिक्रिया अभिव्यक्त की।

इस पुस्तक के सृजनकर्त्ता श्री विनीत मोहन औदिच्य जी ने सभा में आंमत्रित सभी अतिथियों का यथोचित सम्मान करते हुए एवं धन्यवाद अर्पित करते हुए अपनी पुस्तक के बारे में यह कहा कि यह काव्य यात्रा सहज तो नहीं थी किंतु रोचक थी। विविध विषय पर उन्होंने सॉनेट लिखते समय कैसे भावों को एवं शब्दों को अलंकृत किया यह बताते हुए दो सॉनेटस का पाठ किया।

सभा के अंतिम चरण में सभाध्यक्ष प्रसिद्ध हाइकुकार तथा क्षणिकाकार आद. डॉ.शैलेश गुप्त वीर जी ने इस काव्य विधा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। पुस्तक का शीर्षक आनुप्रासिक बताते हुए यह कहा कि पारंपारिक हिंदी छंदों के भांति सॉनेट भी समस्त संवेदन एवं भावों को व्यक्त करने की एक उत्कृष्ट विधा है। चर्चित पुस्तक के समस्त सॉनेटस विविध भाव अर्थात दर्शन, आध्यात्म, संस्कृति, धर्म, प्रेम, प्रार्थना, आस्था, वैराग्य,देशभक्ति तथा स्त्री विमर्श एवं लौकिक जीवन इत्यादि पर आधारित है। डॉ. वीर ने यह पुस्तक पठनयोग्य है कहते हुए यह शुभकामना दी कि निकट भविष्य में औदिच्यन सॉनेट का प्रचलन हो।
आद. लिली मित्रा जी ने सुचारु रूपसे सभा का संचालन करते हुए अपनी सुंदर अभिव्यक्ति प्रदान की। उन्होंने कहा कि सॉनेट की आत्मा, प्रेम है किंतु विषय में विविधता देकर सॉनेटियर विनीत मोहन जी ने इस लेखन शिल्प को और अधिक समृद्ध किया है एवं इसी अभिव्यक्ति के साथ सभा का भव्य समापन हुआ।

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