नर्मदा परिक्रमा की यात्रा तप की श्रेणी में आता है – महेंद्र शास्त्री

नर्मदा परिक्रमा की यात्रा तप की श्रेणी में आता है – महेंद्र शास्त्री

शनिवार की शाम लेखक के नाम में दो पुस्तक ‘हर नर्मदे हर-यात्रा वृत्तांत और ‘हर नर्मदे हर-विशेष संस्मरण’ पर चर्चा

भोपाल।
इंद्रा पब्लिशिंग हाउस और लैंडमार्क द बुक स्टोर की तरफ से ‘शनिवार की शाम लेखक के नाम’ ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत इंद्रा पब्लिशिंग हाउस की चीफ एडिटर श्रीमती दीपाली गुप्ता ने ‘हर नर्मदे हर-यात्रा वृत्तांत के लेखक श्री महेंद्र शास्त्री और ‘हर नर्मदे हर-विशेष संस्मरण’ के लेखक मनोज अत्रे
से ‘हर नर्मदे हर-यात्रा वृतांत’ और ‘हर नर्मदे हर-विशेष संस्मरण’ पुस्तक पर चर्चा की। श्रीमती गुप्ता के इस प्रश्न पर कि “भारतीय संस्कृति में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व है। चार धाम यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन, मानसरोवर यात्रा, अमरनाथ यात्रा सहित पुण्य नर्मदा परिक्रमा सहित अन्य परिक्रमाएं भी उसमें शामिल है।अन्य यात्राएँ और नर्मदा परिक्रमा में क्या अंतर आप महसूस करते हैं?” लेखक महेंद्र शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा कि अन्य परिक्रमा यात्रा में और नर्मदा परिक्रमा में मूल अंतर यही है कि बाकि अन्य पूजा की श्रेणी में आता है और नर्मदा परिक्रमा तप की श्रेणी में| चर्चा के दरमियान लेखक मनोज अत्रे ने बताया कि अपनी यात्रा वृत्तांत को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना साक्षात रूप से यह नर्मदा मैया प्रेरणा की ही थी जिसने हम दोनों को पुस्तक के लिए प्रेरित किया है| कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन ने आत्म चिंतन के लिए प्रेरित किया| लेखक द्वय ने पुस्तक के बारे में विस्तारपूर्ण ढंग से उनके साथ घटी घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि यात्रा वृत्तांत में इन्ही छोटी-छोटी घटनाओं को विस्तार से लिखा है। ग्रामीण अंचलों की सांस्कृतिक विरासत को, उनकी चेतना सम्पन्नता को गहनता से उभारा है। परिक्रमा सम्पूर्ण होने के पश्चात जीवन में आए बदलाव को स्वीकारते हुए कहा कि वे आज तक उन विशेष परिस्थितियों के प्रभाव में हैं| लेखक द्वय ने बताया कि परिक्रमा के दौरान वे गौ-पालन के प्रचार में भी लगे रहे| ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में वैश्विक तौर पर बड़ी संख्या में दर्शक जुड़े रहे|

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