डॉ.हर्ष चतुर्वेदी के नानाविध पुरुषार्थों से ही सागर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना हुई

डॉ.हर्ष चतुर्वेदी के नानाविध पुरुषार्थों से ही सागर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना हुई – मुन्ना शुक्ला

सागर।
आदर्श संगीत महाविद्यालय सागर में संस्था के संस्थापक प्राचार्य डॉ.हर्ष चतुर्वेदी के निधन पर स्मृति- सभा का आयोजन शुक्रवार को किया गया। इस अवसर पर संस्था के सचिव सुभाष कंडया ने स्व. चतुर्वेदी के जीवन वृत्त पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा सागर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना हेतु किए गए संघर्ष को विस्तार पूर्वक उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय चतुर्वेदी एक याचक की भांति सभी लोगों से संपर्क कर उनसे महाविद्यालय की स्थापना में अपना योगदान देने के लिए निवेदन करते थे। वे महाविद्यालय से संबंधित ‌कार्य करने को हमेशा तत्पर रहते थे। हरगोविंद विश्व ने अपने वक्तव्य में उनके द्वारा कार्यक्रमों में समयबद्धता का अनुशासन बनाए रखने के लिए दी जाने वाली समझाइश को रेखांकित किया। डॉ. विभूति मलिक ने कहा कि सागर के लिए लाखा बंजारा का और शिक्षा के लिए डॉ.हरीसिंह गौर का जो योगदान है उसी तरह कला-संगीत के लिए डॉ.हर्ष चतुर्वेदी का नाम सदा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाकर उन्हें याद किया जाता रहेगा।इस अवसर पर संगीत महाविद्यालय के अध्यक्ष मुन्ना शुक्ला ने चतुर्वेदी जी की स्मृति में संस्था और नगर के कला, संगीत, संस्कृति जगत द्वारा प्रदत्त श्रद्धांजलि- पत्र का वाचन करते हुए कहा कि उन दिनों सागर में एक-दो महाराष्ट्रियन घरों के अलावा संगीत शिक्षा शायद ही हुआ करती थी। हालांकि वे गुरू-शिष्य परंपरा के विरोधी नहीं थे तथापि उन्होंने सागर में एक आधुनिक संगीत महाविद्यालय स्थापित करने के स्वप्न को साकार किया। डॉ.हर्ष चतुर्वेदी के नानाविध पुरुषार्थों से ही सागर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना हुई जिसके लिए उन्हें सदैव श्रद्धा से याद किया जाएगा।
श्यामलम् अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र, पाठक मंच संयोजक
आर के तिवारी, श्रुति मुद्रा संस्था की सचिव डा.कविता शुक्ला, डॉ.हर्ष मिश्र, डॉ.गजाधर सागर, डॉ.अलकनंदा पलनीटकर, डॉ अविनाश देसाई, डॉ.राहुल स्वर्णकार, डॉ.आर.आर.पाणडे ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर समाज सेविका डॉ.मीना ताई पिंपलापुरे द्वारा प्रेषित श्रद्धांजलि संदेश का वाचन डॉ.कविता शुक्ला ने एवं संस्था की पूर्व वरिष्ठ संगीत शिक्षिका श्रीमती मिथलेश गंगेले के श्रद्धांजलि पत्र का वाचन उनके पुत्र गगन गंगेले ने किया।
लोक गायक शिवरतन यादव ने स्मृति गीत के रूप में ईसुरी की बुंदेली रचना “केबे खों हो जेहे ईसुर ऐंसे हते फलाने” का गायन कर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।
स्मृति- सभा का व्यवस्थित संचालन म.प्र.हिंदी साहित्य सम्मेलन सागर के अध्यक्ष आशीष ज्योतिषी ने किया तथा संस्था प्राचार्य डॉ. रागिनी श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।
सभा में आदर्श संगीत महाविद्यालय के कर्मचारी, छात्र-छात्राएं , पूर्व छात्र और नगर के कला, साहित्य, संस्कृति से जुड़े सुधिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे जिनमें कपिल बैसाखिया, डॉ. अंजना चतुर्वेदी, डॉ. साधना मिश्र, डॉ. मनीष झा, अवधेश तोमर, हरिओम सोनी, डॉ. अर्पणा चाचोंदिया, डॉ. भुवनेश्वर तिवारी, डॉ. सिद्धार्थ शंकर शुक्ला, के एल तिवारी अलबेला,मुकेश तिवारी, प्रदीप पांडेय, नवल कुमार स्वर्णकार,गगन गंगेले, पूरन सिंह राजपूत, देवीसिंह राजपूत, पुष्पेंद्र दुबे कुमार सागर, अतुल श्रीवास्तव, अंबर चतुर्वेदी चिंतन, गोकुल प्रसाद सोनी, बालकिशन नेमा, आर्यन सोनी, गुलाब सिंह ठाकुर, गणेश प्रजापति, कृष्ण कुमार कटारे, तेजस पटेल, दामोदर चक्रवर्ती, मनोराम चौरसिया, दामोदर चक्रवर्ती के नाम शामिल हैं।

डॉ चंचला दवे सागर

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