राधा गोयल को काव्य रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया

राधा गोयल को काव्य रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया

दिनांक 15 मई 2022 को देश की राजधानी दिल्ली स्थित हिन्दी भवन में कालजयी काव्य ग्रंथ भारत के भारत रत्न का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। इस कालजयी काव्य ग्रंथ के संपादक डॉ राजीव कुमार पाण्डेय जी हैं। आदरणीय ओंकार त्रिपाठी जी द्वारा इसे संकलित किया गया है। इस लोकार्पण समारोह में देश के कोने कोने से आये 150 साहित्यकारों को काव्य रत्न से सम्मानित भी किया गया। बहुत अच्छी व्यवस्था जी। बृजमाहिर जी सम्मानित होने वाले कलमकारों को उनके बैज दे रहे थे जिससे कि सम्मानित किये जाने वाले साहित्यकार की पहचान हो सके।
दीप प्रज्वलन और माँ वीणापाणी के चरणों में वंदना के पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम शुरू हुआ। कुसुम लता कुसुम ने बहुत सुमधुर स्वर में सरस्वती वन्दना की। मुंबई से पधारे स्वागताध्यक्ष श्री राजकुमार छापड़िया जी ने सभी अतिथियों का शॉल, पुष्प गुच्छ व प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया। वे इस कार्यक्रम के भामाशाह भी हैं जैसा कि राजीव पाण्डेय जी ने बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुदर्शन चैनल के अध्यक्ष, प्रबन्ध निदेशक एवं एडिटर इन चीफ सुरेश चौहान ने इस कृति को राष्ट्रीय अस्मिता का ग्रन्थ बताते हुए कहा कि यह केवल एक ग्रन्थ नहीं बल्कि राष्ट्रीय धरोहर बन गया है। इससे भारत की आने वाली पीढ़ी को हमारे देश की महान विभूतियों को काव्यात्मक रूप से पढने को मिलेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार दो बार पद्मश्री से सम्मानित डॉ श्याम सिंह ‘शशि’ ने कहा कि हिंदी साहित्य के इतिहास में इस प्रकार का कार्य होना अपने आप में स्तुत्य है। आज दूसरी बार डाॅ श्याम सिंह ‘शशि’ जी को देखने का अवसर मिला। कभी 1982-83 में किसी कार्यक्रम में देखा था। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि “राष्ट्र के भारत रत्न से विभूषित महापुरुषों को कविताओं के माध्यम से व्यक्त कर एक श्लाघनीय कार्य किया गया है। मैं इसके सम्पादक एवं संकलनकर्ता को ह्र्दय से बधाई देता हूँ।”
इस ग्रन्थ की समीक्षा करते हुए विशिष्ट अतिथि और नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ हरि सिंह पाल ने कहा कि इस विशाल ग्रन्थ में देश विदेश के 215 साहित्यकारों ने इस नए विषय पर सृजन किया है जो अभी तक अछूता था।
विशिष्ट अतिथि और हिंदी अकादमी दिल्ली के सचिव डॉ जीतराम भट्ट ने इसे कालजयी ग्रन्थ की संज्ञा देते हुए कहा कि इसे भारत की प्रत्येक लाइब्रेरी में होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ इंदिरा मोहन, अध्यक्ष दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन ने इसे अभूतपूर्व ग्रन्थ बताया। उन्होंने अपने संबोधन में माताओं और बहनों से अपने बच्चों को उन्नत संस्कार देने और अपनी सभ्यता व संस्कृति का आदर करने की सीख देने की बात कही।
बहुत से जाने पहचाने लोगों से मुलाकात हुई। कई लोगों का केवल नाम पता था लेकिन शक्ल की पहचान नहीं थी। 15/5 को वह भी हो गई।
सभी विशिष्ट अतिथियों के कर कमलों द्वारा इस ग्रन्थ का भव्य लोकार्पण किया गया।
ग्रन्थ के लोकार्पित होते ही पूरा हॉल तालियों से गूँजने लगा।भारत माता की जय के नारे लगने लगे।
देश के कोने कोने से आये 150 साहित्यकारों को अंगवस्त्र, सम्मान पत्र और ग्रंथ भेंटकर सम्मानित किया गया।
ग्रन्थ की पूर्व पीठिका और संघर्ष यात्रा पर संस्था के महासचिव एवं ग्रन्थ के संकलनकर्ता आदरणीय ओंकार त्रिपाठी जी ने विस्तृत प्रकाश डाला। किस तरह से चिलचिलाती धूप में चाँदनी चौक में सामान की व्यवस्था में लगे रहे।
निकष प्रकाशन ने इस ग्रन्थ का प्रकाशन किया है।मुखपृष्ठ बहुत सुन्दर है। कागज उत्तम क्वालिटी का है।हार्ड बाइंडिंग है।
श्याम संगीत सृजन संस्थान शक्ति के द्वारा सम्पादक डॉ राजीव कुमार पांडेय और संकलनकर्ता ओंकार त्रिपाठी को साहित्य मनीषी सम्मान से अलंकृत किया गया।
इस ऐतिहासिक महत्व के कार्यक्रम में संस्था के समर्पित सिपाही अनुपमा पाण्डेय ‘भारतीय’, कुसुमलता कुसुम,गार्गी कौशिक, ब्रज माहिर,यशपाल सिंह चौहान,रजनीश स्वछंद,देवेन्द्र शर्मा देव, राजेश कुमार सिंह श्रेयस, डॉ रजनी शर्मा चन्दा,डॉ स्वेता सिन्हा, मैत्री मेहरोत्रा, का विशेष आभार प्रकट किया गया, जिनके सक्रिय सहयोग से लोकार्पण समारोह भव्य रूप में संपन्न हो सका।
मेरा सौभाग्य है कि मुझे जानी मानी अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका (विशिष्टअतिथि) के कर कमलों द्वारा ग्रन्थ व सम्मान पत्र प्रदान किया गया।

राधा गोयल,विकासपुरी,दिल्ली

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