महिला काव्य मंच शहडोल की ऑनलाइन गोष्ठी संपन्न

महिला काव्य मंच शहडोल की ऑनलाइन गोष्ठी संपन्न

भोपाल।
महिला काव्य मंच शहडोल इकाई के मई माह की गोष्ठी हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता इकाई अध्यक्ष अंजू सिंह बघेल जी ने किया एवं मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल इकाई की अध्यक्ष मधुलिका सक्सेना जी उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि मशहूर गज़लकारा जौनपुर उत्तरप्रदेश से विभा तिवारी जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ प्रीति प्रवीण खरे जी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न भी हुआ। कार्यक्रम का आरंभ इकाई सहसचिव छाया गुप्ता  जी की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ। कार्यक्रम का संचालन इकाई सचिव शिल्पी सिंह बघेल ने किया एवं स्वागत वक्तव्य वरिष्ठ रचनाकार मीना सिंह जी ने दिया। प्रांतीयअध्यक्ष डाॅ प्रीति प्रवीण खरे जी ने बहुत ही अद्भुत तरह से सभी रचनाकारों को अपने उद्बोधन के द्वारा सबको उर्जसित किया इकाई अध्यक्ष अंजू सिंह बघेल जी ने भी अपने वक्तव्य के द्वारा सबका उत्साहवर्धन किया एवं मुख्य अतिथि मधुलिका सक्सेना जी ने सभी की रचनाओं की समीक्षा के साथ सबका उत्साहवर्धन किया।
गोष्ठी में सभी बहनों ने काव्य के द्वारा अलग-अलग रंग बिखेरा।

दोहे –
पहिया घूमें जा रहा , चमचे करते शोर।
राजनीति का गान है , बजे रात से भोर॥
देश भक्त को देखिए , घूसखोर श्रीमान।
राजनीति को घोंटते , बने सभी धनवान॥
                     -डॉ.प्रीति प्रवीण खरे

ममता की लोरी,
प्रियतमा का सिंगार
तुम ही तो हो माँ की ममता,
सुकून दायिनी प्यारी कविता।
                    – मधुलिका सक्सेना

इक घरौंदा जो हौंसले से बना
उनको इक पल लगा गिराने में।
                    – विभा तिवारी

राजे उल्फत किसी से छुपाया नहीं।
फिर भी दिल की तड़प को बताया नहीं।।
                     – अंजू सिंह बघेल

“कविता  कवि मन की
मात्र कल्पना नहीं
यथार्थ भी होता है कभी-कभी”
                      -छाया गुप्ता

मन के चंचल भंवर से निकल ना सके।
श्याम द्वापर के दर्शन करा दो हमें।
ज़िन्दगी बेसुरी सी लगने लगी,
अब तो मुरली की धुन ही सुना दो हमें।
                       – योगिनी काजोल पाठक

मुझे मेरी सिसकियों का सौदा करना है,
ठहरो कुछ पल ग़मों का मसौदा करना है।
                – शिल्पी सिंह बघेल

उम्र भर कोई किसी का तो यहां होता नहीं
               – रेनू श्रीवास्तव

तार टूट गए रिश्तो के मानवता फिर हुई शर्मसार।
पेट की आग बुझाने को हुआ सौदा हुआ देह व्यापार।
                – मीना सिंह

घर में उदासी छाई है। कैसी विपदा घिर आई है।
मां बहुत बीमार है। परेशान पूरा परिवार है।
                 -रागिनी मित्तल
           
कार्यक्रम का अंत अंजू सिंह बघेल जी के द्वारा आभार व्यक्त करते हुए किया।

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