सत्य की मशाल का वार्षिक सम्मान समारोह सम्पन्न

सत्य की मशाल का वार्षिक सम्मान समारोह सम्पन्न

भोपाल 13 मई।
देश की साहित्यिक पत्रिका “सत्य की मशाल” का नौवाँ वार्षिक सम्मान समारोह राष्ट्रीय स्तरीय वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र दीपक की अध्यक्षता, श्री मनोज श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य, सारस्वत अतिथि डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद, डॉक्टर सुरेंद्र बिहारी गोस्वामी के विशेष आतिथ्य और पी.सी. शर्मा की उपस्थिति में हिंदी भवन के महादेवी सभागार में सम्पन्न हुआ।
श्री जवाहर सिंह एवम क्षमा शक्ति पांडे भी मंचासीन रहे।
देवेंद्र दीपक ने उपस्थित साहित्यकारों और कलाकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सत्य की मशाल ने नई पीढ़ियों के साहित्यकारों और कलाकारों को सम्मानित करके पुनीत कार्य किया है। लेखन में निरंतरता से ही गुणवत्ता आएगी। निरंतर पाठन की ज़रूरत है जो लेखन में गुणवत्ता लाएगा। लेखन के नए विषय चुने। निन्यानवे समर्थन के बीच एक विरोध भी गुणवान होता है।
यही साहित्य की उपयोगिता है।

इस अवसर कर मनोज श्रीवास्तव ने सत्य की मशाल पत्रिका की उपदेयता को बताते हुए दुष्यंत के दो शेर सुनाए।

उन्हें पता भी नहीं है कि उनके पाँवों से
वो ख़ूँ बहा है कि ये गर्द भी गुलाल हुई।

मेरी ज़ुबान से निकली तो सिर्फ़ नज़्म बनी
तुम्हारे हाथ में आई तो एक मशाल हुई॥

उन्होंने सत्य की गहनता और गम्भीरता के द्वारा मिथ्या को पराजित करने की आवश्यकता को प्रतिपादित किया। पत्रिकाओं में प्रतिस्पर्धा के साथ समन्वय भी हो। अच्छी रचनाएँ चुनकर प्रकाशित हों।

डॉक्टर सुरेंद्र बिहारी गोस्वामी ने उद्गार व्यक्त करते हुए सत्य और सत में भेद बताते हुए बताया कि सत्य अनादि अनंत ब्रह्म है। सत्य का आभासी प्रमाण सत है। सत्य यदि ब्रह्म है तो सत साधक का अनुभूत तत्व है। सत्य की मशाल सत्य के माध्यम से सत की यात्रा करवाती है।

सारस्वत अतिथि के रूप में तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर मोहन तिवारी “आनंद” ने भी समारोह को सम्बोधित करते हुए विचार व्यक्त किए कि सम्पादक मंडल द्वारा पत्रिका प्रकाशन में नवाचार के फलस्वरूप यह राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गई है। उन्होंने पत्रिका की विकास यात्रा और गुणवत्ता पर प्रकाश डाला।

पूर्व मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने समारोह को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रचारित झूठ और भ्रांतियों का सामना करने के लिए सत्य की मशाल प्रज्वलित करना अनिवार्यता है।

“सत्य की मशाल” मध्यप्रदेश में ही नही बिहार, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश और केरल में पढ़ी जाने वाली पत्रिका बन गई है। सम्पादक जवाहर सिंह ने बताया कि बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ में सत्य की मशाल पत्रिका के कार्यालय संचालित है। बिहार में राजेश मंझवेकर जी तथा झारखंड में संगीता यादव जी लगातार पत्रिका को आगे बढाने में लगे है। विनोद कुमार विक्की जी ने बिहार मे सत्य की मशाल व्यंग्य विशेषांक का विमोचन किया।

कार्यक्रम के आरम्भ में वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश पटवा सहित अठारह रचनाकारों और कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सटीक संचालन राजेंद्र गट्टानी ने किया। सम्मानितों की ओर से आभार प्रदर्शन करते हुए सुरेश पटवा ने कहा कि अच्छा लेखक बनने के पूर्व एक अच्छा पाठक बनना आवश्यक है। कपिल तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य साहित्यकार यथा सी पी जायसवाल, उषा जायसवाल, गोकुल सोनी, पुरुषोत्तम तिवारी, प्रो ए डी खत्री, बिहारीलाल सोनी, कर्नल गिरजेश सक्सेना, अनिल कोचर, विश्वनाथ शर्मा विमल, विनोद जैन, एस के दीवान, प्रीति प्रवीण खरे, के साथ ही कई साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दी।

गोकुल सोनी

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