काव्य भाषा : अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस – रेखा कापसे ‘कुमुद’ नर्मदापुरम

हरिगीतिका छंद

अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस

दीदी कहो सिस्टर कहो,
या नाम दो परिचारिका।
है नेक मन की भावना,
जीवन समर्पित राधिका।।
कहते इसी को नर्स भी,
अब नाम आफीसर मिला।
सम्मान से आह्लाद में,
मुख दिव्य सा उपवन खिला।।

सेवा बसी मन साधना,
नित याचिका स्वीकारती।
अपनी क्षुधा को मार के,
वो मर्ज सबका तारती।।
गोली दवाई बाँट के,
नाड़ी सुगति लय साधती।
मेधा चिकित्सक स्वास्थ्य के,
ये रीढ़ के सुत बाँधती।।

परिचारिका मन भाव से,
सेवा सुधा मय घूँट दे ।
निज स्वार्थ को वह त्याग कर,
परमार्थ का ही खूट दे।।
ये दौर कितना है कठिन,
नित काम ही है साधना।
दिन रात का मत बोध है,
बस मुस्कराहट कामना।।

आओ करे शत् – शत् नमन,
सेवा समर्पित भाव को।
सम्मान से बोले वचन,
नि:स्वार्थ कर्मठ नाव को।।
पर रोग के उपचार में
यह नींद अपनी त्याग दे।
समतुल्य है यह ईश के,
भरपूर मधु अनुराग दे।।

रेखा कापसे ‘कुमुद’
नर्मदापुरम मप्र

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