रवींद्र भवन के संस्थापक स्व.मैत्रा जी के पुण्य स्मरण पर हुआ स्मारिका “आदरांजलि” का विमोचन

मैत्रा जी ने एक साथ कई क्षेत्रों में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई – प्रधान जिला न्यायाधीश श्री अरुण कुमार सिंह

साहित्य मैत्रा जी के जीवन के विविध अनुभवों का सच्चा साक्ष्य – प्रो.आनंदप्रकाश त्रिपाठी

रवींद्र भवन के संस्थापक स्व.मैत्रा जी के पुण्य स्मरण पर हुआ स्मारिका “आदरांजलि” का विमोचन

सागर।
रवीन्द्र मेमोरियल ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी सचिव श्री अनिल चंद्र मैत्रा जी के प्रथम पुण्य स्मरण के अवसर पर गरिमामय श्रद्धांजलि सभा और उनकी स्मृति में स्मारिका “आदरांजलि” का विमोचन कार्यक्रम रवींद्र नाथ टैगोर मेमोरियल ट्रस्ट सागर द्वारा रवींद्र भवन वाटिका के खुले मंच पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में रविवार को संपन्न हुआ।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सागर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय अरुण कुमार सिंह ने अपने वक्तव्य में स्व.मैत्रा को स्मृत करते हुए कहा कि
अनिल चंद्र मैत्रा एक सेवाभावी व्यक्तित्व थे ।समाज के लिए उनका योगदान अतुलनीय है।एक साथ कई क्षेत्रों में उन्होंने
सकारात्मक भूमिका निभाई। वे संघर्ष में जीने वाले व्यक्ति थे। पुरुषार्थ से उन्होंने समाज में अपनी जगह बनाई थी। निर्भीकतापूर्वक उन्होंने सदैव अपना जीवन जिया था।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ.हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो.आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि
अनिल चंद्र मैत्रा एक संत पुरुष थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा में अर्पित कर दिया था। साहित्य उनके जीवन के विविध अनुभवों का सच्चा साक्ष्य है। समाज की समस्याओं के प्रति वे बेहद संवेदनशील थे। अपने सहज , ईमानदार और पुरुषार्थमय जीवनशैली के कारण उन्हें लोक स्वीकृति मिली थी। हमारे लिए वे सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जिला अधिवक्ता संघ सागर के अध्यक्ष डॉ.अंकलेश्वर दुबे अन्नी ने उनसे जुड़े संस्मरण सांझा किए। स्व.मैत्रा जी के पुत्र इंद्रजीत मैत्रा ने रवींद्र मेमोरियल ट्रस्ट को उनके पिता के प्रथम पुण्य स्मरण पर्व पर गरिमामय आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
सभी वक्ताओं ने अपने उदगारों में स्मृति शेष श्री मैत्रा जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की । जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे एडवोकेट कृष्ण वीर सिंह ने उन्हें डॉ.हरीसिंह गौर‌ के पश्चात् सागर के एकमात्र ऐसे वकील के रूप में अभिव्यक्त किया जिसने कानून की पुस्तक, उपन्यास लेखन किया हो साथ ही पूरे जीवन संघर्षशील रहकर रवींद्र भवन जैसा भव्य साहित्य संस्कृति भवन निर्मित कराकर सागर वासियों को उपलब्ध कराया हो। वरिष्ठ एडवोकेट के के सिलाकारी, स्टेट बार कौंसिल सदस्य राजेश पाण्डेय,एड. आर.पी.चौबे,एड.अशोक फुसकेले,एड.उपेंद्र श्रीवास, ग्वालियर ने भी स्व.मैत्रा को कानून के ज्ञाता, साहित्यकार, समाज सेवी, अनुशासन प्रिय, स्पष्टवादी और जूनियर वकीलों के शुभचिंतक व्यक्ति के तौर पर याद किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती पूजन और स्व.मैत्रा के चित्र पर मंचासीन अतिथियों, रवींद्र ट्रस्ट के ट्रस्टीगणों, मैत्रा जी के परिजनों तथा उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। श्रीमती स्वास्तिका, संगीता देव व
दत्ता मैडम द्वारा गुरुवार रवींद्र नाथ के गीत का सस्वर गायन कर प्रभावित किया। अतिथि स्वागत डॉ.निवेदिता मैत्रा, डॉ.दिवाकर मिश्र, डॉ.अरुण सराफ और एड.पैट्रिस फुस्केले ने किया।
रवींद्र मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव डॉ. दिवाकर मिश्र ने कार्यक्रम परिचय और स्वागत भाषण देते हुए स्व. मैत्रा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को उल्लेखित किया। उन्होंने रवींद्र भवन स्थापित किए जाने बाबत स्व.मैत्रा की परिकल्पना और उसको कार्यरूप में परिणित कर वर्तमान स्वरूप तक लाने के संबंध में सागर के गणमान्य नागरिकों, प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के सहयोग की विस्तृत जानकारी दी।
रवींद्र भवन के ट्रस्टी राजेश पंडित ने स्व.मैत्रा के जीवन परिचय का वाचन किया। तत्पश्चात स्व.मैत्रा के‌ जीवन के अनछुए पहलुओं को समेटे हुए उनकी पुण्य स्मृति में
रवींद्र ट्रस्ट ‌द्वारा प्रकाशित भव्य और उत्कृष्ट लेखों से युक्त स्मारिका “आदरांजलि” का विमोचन मंचासीन अतिथियों, मैत्रा परिवार और संपादक मंडल के उमाकांत मिश्र, राजेश पंडित, आशीष ज्योतिषी,प्रो.जी.एल.पुणतांबेकर और असरार अहमद द्वारा किया गया।इस अवसर पर स्मारिका को एक सप्ताह की अल्पावधि में लेख एकत्र कर उन्हें अंतिम रूप देने के लिए सहयोगी ट्रस्टी व प्रमुख संपादक उमा कान्त मिश्र तथा मुद्रक निमिष आर्ट के मुकेश तिवारी का सम्मान भी पुष्पहार पहनाकर मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का व्यवस्थित और सुचारू संचालन सह.ट्रस्टी आशीष ज्योतिषी व राजेश पंडित ट्रस्टी ने किया।
स्व.मैत्रा की पुत्री, रवींद्र ट्रस्ट की संयुक्त सचिव डॉ.निवेदिता मैत्रा ने अपने पिताजी के जीवन पर प्रकाश डाला तथा
कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि कार्यक्रम बहुत ही गरिमापूर्ण , व्यवस्थित और उत्कृष्ट रहा। उन्होंने ट्रस्टीज के भरपूर परिश्रम को आयोजन की सफलता के लिए ,स्मारिका के अल्प समय पर तैयार करने के लिए तथा आज के कार्यक्रम की सफल प्रस्तुति के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर के प्रबुद्धजनों व गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही जिनमें शिव रतन यादव, डॉ.राजेंद्र चउदा, इं.देवेश गर्ग, डॉ.शैलेष आचार्य, डॉ.चंचला दवे, श्रीमती सुनीला सराफ, डॉ. छाया चौकसे, डॉ.पदमा आचार्य, डॉ.अलका शुक्ला,डॉ.दमयंती ज्योतिषी, डॉ.विजय लक्ष्मी दुबे, डॉ.प्रतिभा जैन, डॉ.सुनीला भार्गव, श्रीमती नायक, डॉ.सिद्धार्थ शंकर शुक्ला, यशवंत सिंह राजपूत,रमा कान्त शास्त्री,हरी शुक्ला,आर के तिवारी, वीरेंद्र प्रधान, नीलरतन पात्रा, एड.मोहम्मद इरफान उस्मानी,एड.राजू सराफ,शरद तिवारी, मनोज रायकवार ,नरेश रायकवार,मूरत रायकवार आदि के नाम शामिल हैं।

डॉ चंचला दवे, सागर

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