सद् व्यवहार बाद में पहले सुविधाएं बहाल करे रेलवे – विनोद कुशवाहा , इटारसी

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सद् व्यवहार बाद में पहले सुविधाएं बहाल करे रेलवे

महोदय ,

नवोदित मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रियंका दीक्षित को पदभार ग्रहण करते ही अपने अधिकारियों – कर्मचारियों को रेल यात्रियों व उपभोक्ताओं के साथ सद् व्यवहार करने की सीख देनी पड़ रही है । हालांकि इस बात की जरूरत भी है कि रेल कर्मी न केवल रेल यात्रियों तथा उपभोक्ताओं से सौजन्यतापूर्ण व्यवहार करें बल्कि उनकी समस्याओं को भी पूरी ईमानदारी एवं धैर्य से सुलझाने का प्रयास करें । ये भी सच है कि रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सरलता लाने हेतु उन्हें प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये । इससे आम जनता को बेहतर सुविधाएं तो मिलेंगीं ही साथ ही रेलवे की छवि में भी निखार आएगा । सुविधाओं पर से याद आया कि केवल प्रशिक्षण देने भर से काम नहीं चलेगा । उल्लेखनीय है कि कोरोना के नाम पर रेल यात्रियों को मिलने वाली कितनी ही सुविधाओं को या तो बन्द कर दिया गया या फिर उनमें भारी कटौती कर दी गई । इन सुविधाओं की लंबी फेहरिस्त है । कोरोना की आड़ में कई गाड़ियों के समय में परिवर्तन कर दिया गया है । इनमें ग्रांड ट्रंक जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन भी सम्मिलित् है । वर्षों से चले आ रहे इसके टाइमिंग में बदलाव से रेलवे को क्या लाभ हुआ ये आज तक समझ नहीं आया । क्षेत्रीय सांसद राव उदय प्रताप सिंह भी इस बहुपयोगी ट्रेन का बेड़ा गर्क होता देखते रहे । इधर ट्रेनों के ए सी में पर्दे , कम्बल ,चादर उपलब्ध कराने का सिलसिला भी अभी शुरू नहीं हुआ है । स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों , वरिष्ठ नागरिकों , दिव्यांगों , पत्रकारों को मिलने वाली रियायतों पर अभी भी रोक लगी हुई है । कतिपय ट्रेनों में जनरल टिकटों की सुविधा नाम भर को है । इटारसी जैसे बड़े जंक्शन में मात्र एक टिकट विंडो खुली मिलती है । वहां पर भी जनरल टिकट मांगने पर रेल यात्रियों को टका सा जवाब दे दिया जाता है । शिकायत करने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं रहता । शिकायत पुस्तिका मांगने पर टाल दिया जाता है । जैसे-तैसे अगर शिकायत दर्ज भी करा दी जाए तो सम्बंधित के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती । रोजाना अप-डाउन करने वाले छात्रों , किसानों , व्यापारियों , कर्मचारियों को न तो मासिक सीजन टिकट बनाकर दिये जा रहे हैं न ही उनके त्रैमासिक सीजन टिकट बनाये जा रहे हैं । प्लेटफार्म पर प्रिंट रेट से अधिक दामों पर सामग्री बेची जा रही है । ये सारी असुविधाएं तब हैं जबकि इटारसी रेलवे स्टेशन पर हर दूसरे-तीसरे दिन किसी न किसी रेलवे अधिकारी का औपचारिक दौरा होता रहता है । अब देखना यह है कि रेल यात्रियों से सौजन्यतापूर्ण व्यवहार और उनकी समस्याओं को ईमानदारी एवं धैर्य से सुलझाने की कोशिशें कितनी कामयाब होती हैं ।

– विनोद कुशवाहा
एल आई जी / 85
न्यास कॉलोनी
इटारसी .

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