श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जीवन होता है सुलभ- श्रद्धेय सुरेश शरण शास्त्री

श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जीवन होता है सुलभ- श्रद्धेय सुरेश शरण शास्त्री

कृष्ण-सुदामा मिलन के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का हुआ समापन

श्रीमद्भागवत कथा का समापन, श्रद्धालुओं की रही भीड़

खंडवा।
हमें भगवान की लीलाओं को समझना होगा। जो भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारते हैं, भगवान बिना किसी देरी के आवाज सुनते है व उन्हें दर्शन देते हैं। भगवान को मिलने का रास्ता गुरु दिखाते हैं। इसलिए गुरु की सेवा करनी चाहिए। कृष्ण-सुदामा मित्रता की कथा, सत्यभामा के उद्धार की कथा, प्रभु की कई लीलाओं का वर्णन करते हुए यह बात जय नगर, श्री दादाजी परिसर के आगे सिहाडा रोड आनंद नगर स्थित रामाश्रय प्रांगण में गीता रामायण मंडल अध्यक्ष स्वर्गीय शंकरलाल जायसवाल की पावन स्मृति में जायसवाल परिवार के सहयोग से सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के विश्राम दिवस बुधवार को चित्रकूटधाम हिंगनघाट के व्यास पीठासीन वाणी भूषण सुरेश शरण शास्त्री ने कथा के दौरान वर्णन करते हुए कहीं। यह जानकारी देते हुए राजेश जायसवाल एवं प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि कथा का श्रवण करवाते हुए व्यास पीठ से कहा कि मित्रता में कोई जातपात, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब नहीं देखी जाती है। मित्र धर्म सबसे बड़ा धर्म होता है। कृष्ण-सुदामा की बाल्य काल की मित्रता के बाद जब दोनों एक दूसरे से अलग हो गए तो कृष्ण द्वारिकाधीश बन गए और सुदामा निर्धन हो गए। सुदामा भिक्षाटन से दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पाते थे। एक दिन सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारिका नगरी पहुंचे। जैसे ही द्वारपाल ने अपने स्वामी को सुदामा के आने की जानकारी दी तो कृष्ण बदहवास हो गए और नंगे पांव दौड़े सुदामा के पास पहुंचे। भगवान ने अपने अश्रुनयनों से मित्र के चरण पखारे। मित्रता तो कृष्ण-सुदामा की तरह नि:स्वार्थ होनी चाहिए। भाई भाई के रिश्ते को अनमोल बताया और कहा कि रिश्ते में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है। साथ ही हर कथा श्रवण से जीवन सुलभ होने की सीख दी।संगीतमय कथा विश्राम दिवस पर अनेक मनमोहक भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। अंतिम दिन महाआरती आयोजन के दौरान क्षेत्र विधायक देवेंद्र वर्मा, साहित्यकार जगदीशचंद्र चौरे, प्रमोद जैन, राजेश शकरगाये, निर्मल मंगवानी, राकेश जायसवाल, पन्नालाल जायसवाल परिवार, ज्योति मंगवानी, जानकी अग्रवाल, मनोहर चंदानी, जय एवं किशोर नगर रहवासीगण आदि सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।