काव्य भाषा : द्रवित मन की पुकार – चेतना चितेरी, प्रयागराज

द्रवित मन की पुकार

हे मेरे प्रभु ! दो मुझे ऐसी शक्ति
सत्य की राह पर चल सकूं,
दीन दु:खियों की सेवा कर सकूं,
मृत आत्मा में भी !जिजीविषा भर सकूं,
हे मेरे प्रभु !दो मुझे ऐसी शक्ति।

मानवता का मूल मंत्र
जग में गूंजे
हे मेरे प्रभु!दो मुझे ऐसी शक्ति।

करुणा की जलधारा,त्याग की भाव धारा,
वाणी की अमृतधारा,नि:सृत सबमें,
हे मेरे प्रभु! दो मुझे ऐसी शक्ति।

अचेतन में चेतना की दीप प्रज्वलित कर सकूं
हे मेरे प्रभु !दो मुझे ऐसी शक्ति।

झंकृत उद्गार मन की यही पुकार
हे मेरे प्रभु! मेरी प्रार्थना को सुन लो।

चेतना चितेरी,
प्रयागराज