काव्य भाषा : प्रगति – अलका मधुसूदन पटेल ,जबलपुर म प्र

नवगीत – प्रगति
 
करना है संघर्ष
तभी होगा उत्कर्ष।

संघर्ष तो करना होगा,
जूझना होगा,
ज्योतिर्मय संसार 
बनाना होगा..।
नहीं है कोई उपाय
संघर्षों-कष्टों
से बचने का,
सत्य से हटने का। 
अधिकार के लिए
आगे बढना होगा, 
अंतिम स्वास तक 
मिटना होगा। 
यह नियति नहीं 
प्रगति है तुम्हारे,
नवीन पथ की 
परिणति है। 
वर्जनाएं सदा 
रोकेंगी तुम्हारा पथ, 
अवरुद्ध करेंगी
तुम्हारा रथ।
तुम ठहरना मत
घबराना मत,
बढते जाना 
लड़ते जाना
हर बाधा से
प्रतिबाधा से।  
जीवन बनेगा संघर्ष 
तभी तो होगा
तुम्हारा उत्कर्ष।

– अलका मधुसूदन पटेल जबलपुर म प्र